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रूसी राष्ट्रपति पुतिन दिल्ली से हुए रवाना, PM मोदी के साथ व्यापार और रक्षा मुद्दों पर हुई अहम चर्चा

Published: Sun, 13 Sep 2026 03:37 PM (IST)

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद दिल्ली से अपने देश के लिए रवाना हो गए। उन्होंने पीएम ...और पढ़ें

HighLights

  1. रूसी राष्ट्रपति पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद दिल्ली से रवाना हुए।

  2. पीएम मोदी और पुतिन ने व्यापार, रक्षा संबंधों पर महत्वपूर्ण चर्चा की।

  3. पुतिन ने पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए प्रतिबंधों पर बात रखी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में हुए दो दिवसीय ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रविवार को नई दिल्ली से अपने देश के लिए रवाना हो गए। उनके अलावा चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली भी रविवार को ही दिल्ली से रवाना हो गए।

बता दें कि अपनी इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने ब्रिक्स के दो सत्रों में हिस्सा लिया और भारत मंडपम में 'भारत इनोवेट्स' प्रदर्शनी का भी दौरा किया। इसके अलावा उन्होंने ब्रिक्स बिजनेस फोरम के नेताओं के सत्र को भी संबोधित किया।

पश्चिमी देशों पर जमकर साधा निशाना

गौर करने वाली बात यह है कि इस दौरान पुतिन ने पश्चिमी देशों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि व्यापार और कूटनीति का इस्तेमाल दूसरे देशों के मामलों में दखल देने के लिए किया जा रहा है।

पुतिन ने दावा किया कि रूस पर अब तक 30000 से ज्यादा प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, जो दुनिया के बाकी सभी देशों पर लगाए गए कुल प्रतिबंधों से भी दोगुने से ज्यादा हैं।

पीएम मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बैठक

शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक भी हुई। दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की।

बैठक में 'प्रोग्राम फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2030' को लागू करने को लेकर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और संस्कृति जैसे अहम क्षेत्रों में आपसी सहयोग की समीक्षा की।

वैश्विक मुद्दों पर भी किया गया विचार

इतना ही नहीं पीएम मोदी और पुतिन ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों जैसे क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इन संघर्षों से समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।