तमिलनाडु: यात्री का टिकट चबाकर थूका, फिर बस से उतारा... अब ट्रांसपोर्ट अधिकारी देंगे 60 हजार का मुआवजा
तमिलनाडु के पेरम्बलूर जिला उपभोक्ता आयोग ने राज्य परिवहन निगम के अधिकारियों को एक यात्री को ₹60,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

यात्री की शिकायत की ठीक से जांच न करना सेवा में कमी मानी गई। (फोटो-रॉयटर्स)
HighLights
पेरम्बलूर आयोग ने परिवहन अधिकारियों को ₹60,000 मुआवजा देने का आदेश।
यात्री की शिकायत की ठीक से जांच न करना सेवा में कमी मानी गई।
कंडक्टर पर टिकट नष्ट करने और यात्री को बस से उतारने का आरोप।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु के पेरम्बलूर जिला उपभोक्ता आयोग ने तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम के अधिकारियों को एक यात्री को 50 हजार रुपए का मुआवजा और 10 हजार रुपए का खर्च देने का आदेश दिया है।
यात्री ने आरोप लगाया था कि टिकट खराब हो जाने के बाद उसे बस से उतरने के लिए मजबूर किया गया था। आयोग ने पाया कि उसकी शिकायत की ठीक से जांच न करना सेवा में कमी थी। यह आदेश 2 सितंबर 2026 को जारी किया गया था।
यात्री को मुआवजा देने का आदेश क्यों?
आयोग के आदेश के अनुसार, यात्री 23 मार्च, 2026 को अपने बेटे के लिए दवाई खरीदने वेल्लोर गया था और बाद में पेरम्बलूर जाने वाली बस में सवार था। यात्री ने आरोप लगाया कि उसने टिकट के लिए 500 रुपए दिए थे लेकिन उसे 200 रुपए का टिकट दिया गया और कंडक्टर ने वादा किया कि लोकेशन पर पहुंचने पर बाकी 300 रुपए लौटा देगा।
यात्री का क्या था आरोप ?
यात्री ने आरोप लगाया कि तिरुवन्नामलाई में चाय के ब्रेक के बाद जब यात्री वापस लौटा, तो उसकी सीट पर कोई और महिला बैठी थी। उसने आरोप लगाया कि जब उसने टाइम कीपर से शिकायत की, तो कंडक्टर ने उससे उसका टिकट मांगकर उसे चबाकर थूक दिया।
उसने यह भी आरोप लगाया कि कंडक्टर और ड्राइवर ने उसका सामान बाहर फेंक दिया और बस लेकर चले गए। इसके बाद यात्री ने पेरम्बलूर जाने के लिए दूसरी बस ली और 136 रुपये खर्च किए।
यात्री ने 24 मार्च 2026 को निगम के क्षेत्रीय और जोनल मैनेजरों को कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें 300 रुपए की वापसी, 10 लाख रुपए का मुआवजा, कंडक्टर और ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
निगम ने आरोप किए खारिज
निगम ने यात्री आरोपों को गलत बताया। उसने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन के रिकॉर्ड से पता चलता है कि उसके बताए गए दिन वेल्लोर और पेरम्बलूर के बीच यात्रा के लिए कोई टिकट जारी नहीं किया गया था।
उसने यह भी कहा कि असल किराया 200 रुपये नहीं, बल्कि 212 रुपये था, और तर्क दिया कि बस की तस्वीर से यह साबित नहीं होता कि उसने उसमें यात्रा की थी।
आयोग की जांच में क्या मिला?
अध्यक्ष डी. जवाहर और सदस्य पी. थिलाका और एम. मुथुकमारन की बेंच ने यात्री के इस आरोप को स्वीकार नहीं किया कि उसे गैर-कानूनी तरीके से बस से उतारा गया था।
उन्होंने कहा कि केवल सबूतों के आधार पर इस मुद्दे का फैसला नहीं किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने पाया कि निगम के अधिकारी उसकी शिकायत की ठीक से जांच करने में विफल रहे थे।
आयोग ने देखा कि यात्री ने साफ तौर पर कहा था कि तिरुवन्नामलाई में टाइम-कीपर के सामने पूछताछ के दौरान उसका टिकट नष्ट कर दिया गया था। आयोग ने कहा कि कॉर्पोरेशन को टाइम-कीपर या ब्रांच मैनेजर से इस आरोप की जांच करनी चाहिए थी।
इस मामले पर बेंच ने आगे कहा, 'असल में, यह अजीब बात है कि प्रतिवादियों ने अपने लिखित जवाब में इस पहलू पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी, और इस घटना से इनकार भी नहीं किया इसलिए, प्रतिवादियों की यह आपत्ति कि कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था, बेबुनियाद साबित होती है।
प्रतिवादियों ने पहले और दूसरे प्रतिवादी के हलफनामे तो जमा किए, लेकिन टाइम-कीपर से सहायक हलफनामा या रिपोर्ट लेने में नाकाम रहे।'
जांच नहीं करने पर अधिकारियों की फटकार
आयोग ने कहा कि रीजनल और ज़ोनल मैनेजरों को यात्री का कानूनी नोटिस मिला था, लेकिन उन्होंने कोई जांच नहीं की। आयोग ने उन दस्तावेजों पर भी गौर किया जिनसे पता चलता है कि वह वेल्लोर गया था और उसके बाद तिरुवन्नामलाई से पेरम्बलुर की यात्रा की थी।
आयोग ने कहा कि टिकट के किराए में अंतर इतना बड़ा नहीं था कि बिना सही जांच के उसकी शिकायत को खारिज कर दिया जाए। आयोग ने आगे कहा, 'उपभोक्ताओं के अनुसूचित शोषण से सुरक्षा का अधिकार 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019' में दिया गया एक बुनियादी अधिकार है, लेकिन इस मामले में बिना किसी जांच के इसे नजरअंदाज कर दिया गया है। यह आयोग इसे तीसरे और चौथे प्रतिवादी की ओर से सेवा में निश्चित कमी मानता है'
सेवा में कमी के आरोप में मुआवजे का आदेश
आयोग ने सेवा में कमी के लिए रीजनल और जोनल मैनेजरों को जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने यात्री को मानसिक परेशानी के लिए 50 हजार रुपए और खर्च के तौर पर 10 हजार रुपए देने का आदेश दिया। साथ ही कंडक्टर और ड्राइवर के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी।
