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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 10, 2012 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मानसिक तनाव लेता है रोजाना तीन हजार जानें

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Published: Wed, 10 Oct 2012 10:48 AM (IST)Updated: Wed, 10 Oct 2012 11:18 AM (IST)

सभ्यता, समाज और विज्ञान की प्रगति के साथ-साथ लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी काफी बदलाव आया है। इसके ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, [सुमन अग्रवाल]। सभ्यता, समाज और विज्ञान की प्रगति के साथ-साथ लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी काफी बदलाव आया है। इसके साथ ही लोगों की सोच, जीवन शैली में भी काफी परिवर्तन हुआ है। अधिक सुख व आराम की तलाश में लोग मानसिक रोग का शिकार हो रहे हैं। लोग जितने मॉडर्न व उन्नत हो रहे हैं, उनकी इच्छाओं व उम्मीदों का दायरा उतना ही बढ़ता जा रहा है। वह धीरे-धीरे मेंटल डिसऑर्डर की ओर अग्रसर हो रहे हैं और उन्हें इसका अहसास तक नहीं हो रहा है। इसकी वजह से उनकी रोजमर्रा की सहज और सीधी जिंदगी जटिल बन रही है। विश्व के 350 मिलियन लोग मानसिक रोक के शिकार हैं। उनके लिए मेंटल डिसआर्डर ही सबसे बड़ी बीमारी के तौर पर खड़ी हो गई है। व‌र्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा कराए गए एक सर्वे के मुताबिक भारत और अमेरिका में सबसे ज्यादा डिप्रेशन और मेंटल इलनेस के पीड़ित मिलेंगे।

सर्वे के मुताबिक प्रतिदिन 10 लोगों में से एक लोग इस बीमारी का शिकार होते हैं। विश्व के 125 मिलियन लोग मानसिक असंतुष्टि का शिकार हैं। अमेरिका में 24 फीसद लोग मेंटल डिसऑर्डर का शिकार हैं, वहीं भारत के 14 फीसद लोग इस मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं।

सर्वे में बताया गया है कि वर्ष 2020 तक मेंटल डिसऑर्डर व मानसिक रोग सबसे बड़ी बीमारी के तौर पर सामने आ जाएगा। इस बीमारी से ग्रसित होकर विश्व में पूरे दिन भर में 3 हजार से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं। 14 से 44 साल की उम्र के लोगों में यह ज्यादा देखने को मिलती हैं।

क्या है मेंटल इलनेस?

मेंटल इलनेस कुछ भी नहीं बस मन की एक बीमारी है। जब आपका मन अस्वस्थ रहता है तभी आप मेंटल डिसऑर्डर का शिकार होते हैं। नींद पूरी न होना, दिन भर सोचते रहना, मानसिक तनाव, आफिस व अपनी निजी जिंदगी में खींचतान, जीवन शैली में बदलाव, भाग दौर, दुख, फिलिंग आफ गिल्ट इन सबकी वजह से परेशानियां बढ़ती हैं। धीरे-धीरे इन्सान आस्तमा, इनसोमनिया, आर्थाइटिस, डाइबिटिज इस तरह की बीमारियों का शिकार हो जाता हैं।

भारत में पुरुषों से अधिक महिलाएं अवसादग्रस्त

भारत में पुरुषों से पचास फीसद महिलाएं इस बीमारी से ग्रसित हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ के अनुसार भारत की महिलाएं रोज किसी न किसी मानसिक तनाव से गुजरती हैं। घर से ऑफिस तक की आपाधापी उनकी जिंदगी को असंतुलित कर देती है। क्योंकि महिलाएं भावनाओं से ज्यादा जुड़ी हुई रहती हैं, इसलिए उन्हें इन परेशानियों से जूझना पड़ता हैं। अगर ऐसा ही रहा तो वर्ष 2030 तक भारत मेंटल डिसआर्डर जैसी बीमारी का घरौंदा बन जाएगा।

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