यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 17, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पेट्रोल-डीजल की राहत को टैक्स लगाकर छीना: अरुण यादव
कच्चे तेल की कीमत में लगातार गिरावट के बावजूद केन्द्र और राज्य सरकार राहत देने तैयार नहीं है। सरकारों ने ...और पढ़ें

भोपाल [ब्यूरो]। कच्चे तेल की कीमत में लगातार गिरावट के बावजूद केन्द्र और राज्य सरकार राहत देने तैयार नहीं है। सरकारों ने टैक्स लगाकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जितना फायदा मिलना था, उसे अपने फायदे के लिए रोक लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने आरोप लगाया कि जब से भाजपा सरकार केन्द्र में आई है चार बार पेट्रोलियम पदार्थो पर एक्साइज ड्यूटी ब़़ढाई जा चुकी है।
यादव ने कहा कि केन्द्र में भाजपा सरकार आने के बाद से कच्चे तेल के दामों में 58 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है पर इसका सीधा फायदा जनता को नहीं मिला। केन्द्र ने चार बार एक्ससाइज ड्यूटी ब़़ढाकर लगभग 20 हजार करोड़ रुपए जमा कर लिए। इसी तरह प्रदेश सरकार ने भी दिसंबर में पेट्रोल और डीजल पर वैट टैक्स ब़़ढा दिया। जबकि, यूपीए सरकार के वक्त कच्चा तेल अपने उच्चतम स्तर पर था लेकिन इसका असर जनता पर नहीं प़़डने दिया। जब भी दाम कम हुए फायदा सीधे लोगों को मिला।
मई 2009 में कच्चे तेल की कीमत 51 डालर प्रति बैरल थी। तब डीजल 30 और पेट्रोल 41 रुपए लीटर था। जनवरी 2010 में तेल 81 डालर प्रति बैरल हुआ तब डीजल 34 और पेट्रोल 55 का हो गया। मार्च 2011 में 125 डालर प्रति बैरल कच्चा तेल होने पर डीजल प्रति लीटर 41 और पेट्रोल 64 रुपए का हुआ करता था। 2012 में कच्चा तेल 120 डालर हुआ तो डीजल 42 और पेट्रोल 70 रुपए लीटर हो गया। अगस्त 2013 में डीजल 53 और पेट्रोल 74 रुपए का था। अगस्त 2014 में कच्चे तेल के दाम घटकर 100 डालर प्रति बैरल हो गए लेकिन डीजल 64 और पेट्रोल 75 रुपए लीटर का हो गया। अब जबकि कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में 46 डालर प्रति बैरल पहुंच गया है तब डीजल करीब 58 और पेट्रोल 69 रुपए लीटर है। इसके मायने ये हुए कि जिस अनुपात में लोगों को राहत मिलनी चाहिए थी वो सरकार ने नहीं दी।
