यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 28, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गुलबर्ग सोसाइटी में नहीं घुस पाई तीस्ता सीतलवाड़
गुजरात के दंगा पीड़ितों का अपने कथित हमदर्दो से मोह भंग हो चुका है। यही वजह रही कि उन्होंने दंगों ...और पढ़ें

अहमदाबाद [शत्रुघ्न शर्मा]। गुजरात के दंगा पीड़ितों का अपने कथित हमदर्दो से मोह भंग हो चुका है। यही वजह रही कि उन्होंने दंगों की 10वीं बरसी पर तीस्ता सीतलवाड़ को गुलबर्ग सोसाइटी में घुसने तक नहीं दिया, जो एक दशक से पीड़िता की रहनुमाई का झंडा उठाए घूम रही हैं। पीड़ितों ने कहा है कि तीस्ता उन 75 लाख रुपयों का हिसाब दें जो उन्होंने पीड़ितों के नाम पर देश-दुनिया से बंटोरा है। सोसाइटी के पीड़ितों का गुस्सा देख तीस्ता ने दंगा पीड़ितों की बस्ती सिटीजन नगर में मृतकों की याद में फातिहा पढ़ा। इस मौके पर उन्होंने राज्य सरकार से बस्ती में पानी, सीवेज व सफाई व्यवस्था मुहैया कराने की मांग की।
गुलबर्ग सोसाइटी के लोगों ने दंगों में मारे गए लोगों की याद में सिविल सोसाइटी बनाई है, जिसके बैनर तले हर साल 28 फरवरी को सोसाइटी में फातिहा पढ़ा जाता है। मुंबई निवासी सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी जकिया और पुत्र तनवीर के साथ हर साल सोसाइटी में फाहिता पढ़ने आती रही हैं, लेकिन इस बार पीड़ितों ने उन्हें सोसाइटी में आने नहीं दिया। तनवीर अकेले गुलबर्ग पहुंचे और फातिया पढ़ा।
पीड़ितों का आरोप है कि तीस्ता ने दंगों को लेकर देश-दुनिया में ख्याति बटोरी। साथ ही आलीशान म्यूजियम, सामुदायिक भवन निर्माण के नाम पर 75 लाख चंदा बटोरा। सोसायटी निवासी फिरोज खान पठान ने कहा, तीस्ता चंदे का पैसा लोगों में बांटे। सोसायटी ने पिछले दिनों अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त को पत्र भेजा था जिसमें दंगों में मारे गए लोगों के नाम पर पैसा व प्रसिद्धि कमाने वालों को सोसाइटी में आने से रोकने की मांग की गई थी। सोसाइटी ने पत्र में संस्थाओं के नाम व दान की रकम का उल्लेख करते हुए पैसा पीड़ितों को लौटाने की मांग भी की है।
वहीं, तनवीर जाफरी ने तीस्ता के विरोध के बारे में कहा, हर जगह ऐसा होता है कुछ लोग विरोध कर सकते हैं। चंदा हड़पने के आरोप पर कहा, गुलबर्ग में बड़ा म्यूजियम बनना था लेकिन पर्याप्त भूमि व धन के अभाव में सामुदायिक भवन बनाने की योजना है, ताकि पीड़ितों के बच्चों को प्रशिक्षण, पुस्तकालय जैसी सुविधा दी जा सके।
ज्ञात हो, 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस 6 कोच को कट्टरपंथियों ने आग लगा दी थी जिसमें 58 कारसेवकों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के अगले दिन 28 फरवरी को अहमदाबाद समेत राज्य के कई इलाकों में दंगे भड़क उठे थे। अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में दंगाइयों ने कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी समेत 69 लोगों को मार डाला था।
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