यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 28, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय लेने को लेकर दायर की गई याचिका SC ने खारिज की
जस्टिस अमिताव रॉय और यूयू ललित की खंडपीठ ने गुलाम कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय केंद्र सरकार के लेने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया।

नई दिल्ली, प्रेट्र । सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि सशस्त्र बल सरकार के प्रति जवाबदेह हैं। अगर ऐसा न होता तो देश में सैन्य शासन (मार्शल लॉ) होता।
जस्टिस अमिताव रॉय और यूयू ललित की खंडपीठ ने गुलाम कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय केंद्र सरकार के लेने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में सेना के काम में दखल देने के लिए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर के खिलाफ कार्रवाई की अपील की गई थी। खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका विचार करने योग्य नहीं है। इसलिए इसे खारिज किया जाता है। इस याचिका में कोई मेरिट नहीं है। सशस्त्र सेनाएं अगर सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं होतीं तो इस देश में सैन्य शासन होता।
इस याचिका को दाखिल करने वाले वकील एमएल शर्मा ने कहा कि रक्षा मंत्री समेत कई केंद्रीय मंत्री भारतीय सेना की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय लेते रहे हैं। लेकिन संविधान के प्रावधानों के तहत वह ऐसा करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। खासकर तब जब सशस्त्र सेनाओं के मुखिया राष्ट्रपति हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सशस्त्र सेना की कार्रवाई को कुछ लोग अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। शर्मा ने ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की अपील की। इस पर खंडपीठ ने कहा, 'इसमें किसी का क्या निजी हित हो सकता है? सशस्त्र सेनाएं सरकार के प्रति जवाबदेह हैं।'
