यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 04, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सेवानिवृत जजों को सुरक्षा के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
इस बारे में विस्तृत दिशानिर्देश और व्यापक तंत्र बना हुआ है पूरे देश में उसी का पालन होता है। ये कार्यपालिका का विशेषज्ञता वाला काम है।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में हाईकोर्ट और जिला अदालतों के सेवानिवृत जजों व पूर्व एडवोकेट जनरलों को सुरक्षा देने के हाईकोर्ट के आदेश पर सोमवार को अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने ये आदेश जम्मू कश्मीर सरकार की याचिका पर जारी किये।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार के वकील राजीव धवन व शोएब आलम की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट के आदेश और सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही याचिका में प्रतिपक्षी बनाए गए पक्षकारों को आठ सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया।
इससे पहले धवन ने हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि सेवानिवृत जजों को सुरक्षा देने का आदेश ठीक नहीं है। पूरे देश मे वीआइपी व अन्य किसी को भी सुरक्षा गृह मंत्रालय द्वारा तय दिशानिर्देशों में उस व्यक्ति की जान को होने वाले खतरे को देखते हुए दी जाती है।
इस बारे में विस्तृत दिशानिर्देश और व्यापक तंत्र बना हुआ है पूरे देश में उसी का पालन होता है। ये कार्यपालिका का विशेषज्ञता वाला काम है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी अपने आदेशों मे कह चुका है कि किसे सुरक्षा देनी चाहिए और किसे नहीं देनी चाहिए ये विशेषज्ञता का मसला है और कोर्ट इस बारे में आदेश नहीं दे सकता।
क्या है हाईकोर्ट का आदेश
जम्मू कश्मीर सरकार ने हाईकोर्ट के गत वर्ष 14 मार्च, 28 नवंबर और इस वर्ष 17 फरवरी के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इन आदेशों में हाईकोर्ट ने सेवानिवृत न्यायाधीशों को चौबीस घंटे सुरक्षा देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट का आदेश है कि हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और सेवानिवृत न्यायाधीशों के घर पर 1-4 सुरक्षा गार्ड तैनात किये जाएं और साथ में एक पर्सनल सिक्योरिटी आफीसर (पीएसओ) भी दिया जाए। सुरक्षा में और इजाफा उनकी जान के खतरे को देखते हुए किया जा सकता है।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को सेवानिवृत होने के एक साल बाद तक सुरक्षा दी जाए इसके बाद सुरक्षा समिति उनकी सुरक्षा के बारे में समीक्षा करके निर्णय लेगी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया था कि सरकार राज्य पूर्व एडवोकेट जनरलों के घर पर चौबीस घंटे 1-3 सुरक्षा गार्ड तैनात करे साथ ही मांगे जाने पर पर्सनल सिक्योरिटी आफीसर (पीएसओ) दे। सुरक्षा समीक्षा कमेटी की समीक्षा में खतरे को देखते हुए सुरक्षा और बढ़ाई जा सकती है।
