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'जुर्माना भर कर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता', वाहनों की ओवरलोडिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश

Published: Fri, 02 Oct 2026 06:34 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने ओवरलोडिंग वाहनों पर सख्त रुख अपनाया है, जिसमें कहा गया है कि जुर्माना भरने से वाहन आगे ...और पढ़ें

ओवरलोडिंग पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश (फाइल फोटो)

ओवरलोडिंग पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश (फाइल फोटो)

HighLights

  1. ओवरलोड वाहन जुर्माना भरकर आगे नहीं बढ़ सकेंगे।

  2. अतिरिक्त भार उतारे बिना वाहन को आगे जाने की अनुमति नहीं।

  3. सुप्रीम कोर्ट ने ओवरलोडिंग को सड़क सुरक्षा के लिए खतरा माना।

माला दीक्षित, नई दिल्ली। ये नहीं हो सकता कि ओवरलोडिंग करके जा रहा कोई ट्रक या अन्य वाहन जुर्माना भर कर आगे बढ़ जाए। जुर्माना भर कर ओवरलोड वाहन को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि ओवरलोडिंग सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

शीर्ष अदालत ने ओवरलोडिंग के खतरे बताते हुए उस पर रोक की मांग वाली अर्जी में दिये सुझावों को स्वीकार कर लिया है। जिसके मुताबिक निर्धारित सीमा से अधिक भार लेकर चलने वाले वाहन को अतिरिक्त भार उतारे बिना आगे जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कोई ओवरलोड वाहन जुर्माना भर कर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

ये आदेश न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने सड़क सुरक्षा और मोटरवाहन नियमों के अनुपालन से संबंधित मामले में सुनवाई के दौरान गत 28 सितंबर को दिये। कोर्ट ने वकील केसी जैन की अर्जी में ओवरलोडिंग वाहनों से सड़क सुरक्षा को होने वाले गंभीर खतरे और इस पर रोक लगाने के लिए दिये गए सुझाव और की गई मांगे स्वीकार कर ली।

कोर्ट ने अर्जी में की गई मांगों पर सभी राज्यों केंद्र शासित प्रदेशों, एनएचएआइ और संबंधित सड़क प्राधिकरणों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।

मामले पर सुनवाई के दौरान जैन ने अर्जी पर स्वयं बहस करते हुए न सिर्फ ओवरलोडिंग की समस्या का उल्लेख किया बल्कि यह स्पष्ट किया कि वर्तमान में केवल पेनाल्टी या अतिरिक्त शुल्क वसूल करके ओवरलोड वाहनों को आगे जाने देना सड़क सुरक्षा के उद्देश्य को पूरा नहीं करता।

उन्होंने अनुरोध किया कि ओवरलोड वाहनों को रोका जाए, अतिरिक्त भार उतरवाया जाए, वाहन का पुन: भार मापा जाए और निर्धारित सीमा के भीतर आने के बाद ही उसे जाने दिया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एनएचएआई द्वारा तैयार की गई ओवरलोडिंग संबंधी मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) जो कि केरल हाई कोर्ट में एक संबंधित मामले पर सुनवाई के दौरान पेश की गई थी, को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। और भार मापन इलेक्ट्रिक प्रवर्तन तथा अतिरिक्त भार उतारने की पूरी प्रक्रिया का नियमित ब्योरा रखा जाए।

कोर्ट ने जैन के सुझावों को स्वीकार किया। कोर्ट ने कहा कि जिस परिवहन वाहन में मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा से अधिक भार पाया जाए उसे जांच के स्थान से आगे नहीं बढ़ने दिया जाए। चाहें ओवरलोडिंग टोल या शुल्क प्लाजा, चेकपोस्ट या किसी अन्य प्रवर्तन स्थल पर पकड़ी जाए, वाहन को आगे भेजने से पहले अतिरिक्त भार उतारना होगा। आवेदन में ओवरलोडिंग की निगरानी को इलेक्ट्रिक प्रवर्तन व्यवस्था से जोड़ने का सुझाव भी दिया गया था।

इस पर कोर्ट ने वेट इन मोशन, और वेट ब्रिज सिस्टम, को टोल मैनेजमेंट सिस्टम तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136ए और केंद्रीय वोटर वाहन नियमों के नियम 167ए के तहत इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन व्यवस्था से जोड़ने की बात कही है।

इसका उद्देश्य अलग अलग राज्यों में वाहन के जाने पर भी ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाए रखना है।

कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एनएचएआइ तथा अधिकृत अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिये हैं। इसके अलावा ओवरलोड वाहनों की पहचान, चालान, अतिरिक्त भार हटाने, वजन करने वाले उपकरणों के खराब होने और नियमों के विपरीत वाहनों को आगे जाने देने से जुड़ा डेटा नियमित रूप से उपलब्ध कराने को कहा गया है।

अर्जी में सड़क परिवहन मंत्रालय की पांच वर्षों 2019 से लेकर 2023 तक की वार्षिक रिपोर्ट में वाहन के भार के कारण पांच साल में कुल 140945 दुर्घटनाएं होने और इनमें 60082 मौतें दर्ज होने की बात भी कही गयी है जो कि अपने आप में बताता है कि ओवरलोडिंग सड़क सुरक्षा के लिए कितना खतरा है।