यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 16, 2012 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पंचायतों के तुगलकी फरमानों पर लगाम कसने की सिफारिश
इज्जत के नाम पर युवाओं की नाक में दम करने वाली पंचायतों के तुगलकी फरमानों पर लगाम कसने की तैयारी ...और पढ़ें

नई दिल्ली। इज्जत के नाम पर युवाओं की नाक में दम करने वाली पंचायतों के तुगलकी फरमानों पर लगाम कसने की तैयारी हो रही है। अदालत के न्यायमित्र (एमाइकस क्यूरी) ने सुप्रीम कोर्ट को पंचायतों के गैरकानूनी आदेशों से सुरक्षा व रोकथाम के उपाए सुझाए हैं। न्यायमित्र ने अपने सुझाव वाली रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दी है। इस पर सोमवार को सुनवाई होनी है।
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में बागपत के एक गांव की पंचायत ने प्रेम विवाह करने वालों व महिलाओं के लिए कई तरह की पाबंदियां घोषित कीं। इससे एक बार फिर पंचायतों के गैर कानूनी आदेशों पर चर्चा गर्म है।
सुप्रीम कोर्ट में दो वर्ष से एक जनहित याचिका लंबित है जिसमें खाप पंचायतों के गैरकानूनी आदेशों और ऑनर किलिंग के मुददे को उठाया गया है। याचिका में पंचायतों के ऐसे आदेशों से युवाओं को सुरक्षा देने की मांग की गई है। शीर्ष अदालत ने इसी मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन को अदालत का न्यायमित्र नियुक्त किया था और उनसे नागरिकों के कानूनी हक में दखल देने वाली खाप पंचायतों व सामाजिक संगठनों के गैर कानूनी आदेशों पर रोकथाम के सुझाव मांगे थे।
न्यायमित्र ने रिपोर्ट में ऐसे आदेशों पर रोकथाम के लिए करीब दो दर्जन उपाय सुझाए हैं व कानून व्यवस्था चाक चौबंद करने की बात कही है। ऑनर किलिंग का मुददा उठाने वाले स्वयंसेवी संगठन शक्ति वाहिनी के वकील रविकांत कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी कर चुका है। पंजाब व हरियाणा जैसे कुछ राज्यों ने कोर्ट के निर्देश पर एक्शन प्लान भी तैयार किया लेकिन कानून लागू करने वाली एजेंसी पुलिस के ढीले रवैये के कारण कोई खास नतीजा नहीं निकला।
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