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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 29, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कठघरे में जस्टिस गांगुली

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Published: Fri, 29 Nov 2013 06:55 PM (IST)Updated: Sat, 30 Nov 2013 12:34 AM (IST)

प्रशिक्षु महिला वकील के यौन उत्पीड़न मामले में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार गांगुली का नाम सामने आया ...और पढ़ें

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रशिक्षु महिला वकील के यौन उत्पीड़न मामले में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार गांगुली का नाम सामने आया है। मामले की जांच कर रही सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की समिति ने जस्टिस गांगुली के भी बयान दर्ज किए हैं।

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समिति ने गुरुवार को आरोपों की जांच रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश पी. सतशिवम को सौंप दी। हालांकि, जस्टिस गांगुली ने आरोपों को नकार दिया है, लेकिन अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंद्रा जयसिंह और सुप्रीम कोर्ट की वकील कामिनी जायसवाल ने उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने की मांग की है। इस समय जस्टिस गांगुली पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं। वह फरवरी, 2012 में सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए थे।

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जस्टिस गांगुली का नाम शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के बाद सामने आया है। शीर्ष अदालत की ओर से जारी सूचना में बताया गया है कि प्रशिक्षु महिला वकील द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच कर रही तीन सदस्यीय समिति ने जांच रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश को सौंप दी है। सुप्रीम कोर्ट के डिप्टी रजिस्ट्रार ने बताया कि पीड़िता ने भी समिति के समक्ष बयान दर्ज कराए हैं। साथ ही पीड़िता की ओर से समिति को तीन हलफनामे भी दिए गए हैं। जांच समिति ने 13, 18, 19, 20, 21, 26 और 27 नवंबर को कुल सात बैठकें की। इसके बाद 28 नवंबर को जांच रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश को सौंप दी।

गौरतलब है कि एक महिला प्रशिक्षु वकील ने ब्लॉग में सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। बाद में एक वेबसाइट में और वेबसाइट के हवाले से एक अखबार में खबर छपी, जिसमें प्रशिक्षु ने आरोप लगाया है कि दिसंबर, 2012 में दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म के विरोध में प्रदर्शन चल रहा था। ंउस समय हाल ही में सेवानिवृत्त हुए सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने होटल के कमरे में उसका यौन उत्पीड़न किया था।

प्रशिक्षु ने जज के नाम का खुलासा नहीं किया था। मुख्य न्यायाधीश ने खबरों में आए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए 12 नवंबर, 2013 को आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की एक जांच समिति गठित कर दी। न्यायमूर्ति आरएम लोढा, एचएल दत्तू और रंजना प्रकाश देसाई की तीन सदस्यीय समिति ने गठन के दूसरे ही दिन काम शुरू कर दिया था।

चर्चित फैसलों से जुड़े रहे हैं गांगुली

सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश रहते जस्टिस एके गांगुली कई चर्चित फैसलों से जुड़े रहे हैं। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में 122 लाइसेंस निरस्त करने वाला अहम फैसला देने वाली पीठ के एक सदस्य गांगुली भी थे। इसके अलावा हिंदू मैरिज एक्ट के तहत अवैध संतान को माता-पिता की संपत्ति में हिस्सेदार बनाने वाले फैसले में भी गांगुली भागीदार रहे। साथ ही आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों के निलंबन की बात कहने वाले संविधान पीठ के बहुमत के फैसले को गांगुली ने गलत ठहराया था।

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'मैं समिति को बता चुका हूं कि प्रशिक्षु के आरोप गलत हैं। मुझे नहीं पता ये आरोप कैसे लगाए गए। मुझे गहरा धक्का लगा है। मैं आरोपों को सिरे से खारिज करता हूं।'

-जस्टिस एके गांगुली

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