यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 09, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनाई सरकार और सीबीआइ को खरी-खरी
कर्नाटक में जीत की खुशी को कांग्रेस सरकार पर कोयला की कालिख से ग्रहण लग गया है। एक तरफ जीत ...और पढ़ें

नई दिल्ली। कर्नाटक में जीत की खुशी को कांग्रेस सरकार पर कोयला की कालिख से ग्रहण लग गया है। एक तरफ जीत का जश्न तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट की फटकार। सीबीआइ की साख पर सवाल तो लग ही गया है। कोयला घोटाले की सीबीआइ जांच में छेड़छाड़ के मामले की सुनवाई कर रही तीन सदस्यीय पीठ ने इस जांच एजेंसी के साथ-साथ अटॉर्नी जनरल, एडिशनल अटॉर्नी जनरल, कानून मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिवों को जमकर लताड़ लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ और सरकार के खिलाफ इतनी कठोर टिप्पणियां कीं कि कांग्रेसप्रवक्ताओं के लिए मुंह छिपाना मुश्किल हो गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खास बिंदु
-केंद्र सरकार 10 जुलाई से पहले सीबीआइ को बाहरी दबाव व हस्तक्षेप से मुक्त करने वाला कानून लाए।
-आइबी में स्थानांतरित रवि कांत को जांच सौंपने के लिए तत्काल कदम उठाए केंद्र व सीबीआइ।
-सीबीआइ अपने 33 सदस्यीय दल व निदेशक के अलावा किसी से साझा न करे जांच की प्रगति रिपोर्ट
-जांच एजेंसी कोयला घोटाले की प्रगति रिपोर्ट कानून मंत्री, अन्य केंद्रीय मंत्रियों, सीबीआइ के वकील या सीबीआइ के अभियोजन विभाग से भी साझा न करे।
सुप्रीम कोर्ट की खरी-खरी
-सीबीआइ बनी कई मालिकों की भाषा बोलने वाला तोता
-जांच एजेंसी का काम सरकारी अधिकारियों से बात करना नहीं
-सच का पता लगाने के लिए पूछताछ है जांच एजेंसी का काम
-जांच रिपोर्ट सरकार से साझा करने वाली प्रगति रपट नहीं
-मामला दर्ज करने के बाद नहीं हुई जांच में खास प्रगति
-सीबीआइ सरकारी दबाव के सामने खड़ा होना सीखे
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