यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 09, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सरकार ने ली राहत की सांस
सीबीआइ को असंवैधानिक ठहराने से सकते में आई सरकार को बड़ी राहत मिल गई है। सीबीआइ को पिंजरे में कैद ...और पढ़ें

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सीबीआइ को असंवैधानिक ठहराने से सकते में आई सरकार को बड़ी राहत मिल गई है। सीबीआइ को पिंजरे में कैद तोता बताने वाले सुप्रीम कोर्ट ने ही यह राहत प्रदान की है। शीर्ष न्यायालय ने सीबीआइ के गठन का प्रस्ताव रद करने के गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस आदेश के बाद सीबीआइ पहले की तरह कामकाज करती रहेगी और चल रही जांचों या मुकदमों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 6 दिसंबर को होगी।
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने गत 6 नवंबर को सीबीआइ के गठन का 1 अप्रैल 1963 का केंद्र सरकार का प्रस्ताव रद कर दिया था और जांच एजेंसी को असंवैधानिक बता दिया था। इस फैसले को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। शनिवार को याचिका दाखिल करने के बाद सरकार ने मामले को अत्यावश्यक बताते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।
इसे स्वीकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश पी. सतशिवम ने छुट्टी का दिन होने के कारण अपने आवास पर विशेष सुनवाई की और हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। पीठ ने हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता नवेन्द्र कुमार को नोटिस भी जारी किया है। पीठ में न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई भी शामिल थीं।
इससे पहले सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने आदेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि फैसले का सीबीआइ के कामकाज पर गंभीर असर पड़ रहा है। देशभर में सीबीआइ के लंबित 9000 मुकदमे और चल रही करीब 1000 जांचे इससे प्रभावित हो रही हैं। विभिन्न अभियुक्तों ने इसे आधार बनाते हुए कोर्ट से सुनवाई पर रोक लगाने की मांग कर दी है। सीबीआइ में जांच और अभियोजन में लगे 6000 कर्मचारियों पर भी असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सीबीआइ भी याचिका दाखिल करेगी। पीठ ने उनकी दलीलें सुनने के बाद नवेन्द्र कुमार को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया। सीबीआइ के प्रशासनिक आका कार्मिक मंत्रालय की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि आदेश या प्रस्ताव जारी करते समय प्रावधान का जिक्र करना जरूरी नहीं है और न ही प्रस्ताव पर राष्ट्रपति की सहमति लेनी जरूरी है। बता दें कि इसी को आधार बनाते हुए गुवाहाटी हाई कोर्ट ने सीबीआइ को असंवैधानिक करार देते हुए कहा था कि यह न तो सरकार का हिस्सा है और न ही पुलिस बल है।
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलीलें
1. सीबीआइ का गठन दिल्ली स्पेशल एस्टैब्लिशमेंट (डीएसपीई) एक्ट 1946 के तहत हुआ है।
2. इसकी धारा 2 सरकार को विशेष पुलिस बल गठित करने का अधिकार देती है और इसी के तहत सीबीआइ गठन का 1 अप्रैल 1963 को प्रस्ताव भी पारित किया था
3. प्रस्ताव में प्रावधान का जिक्र करना जरूरी नहीं। सिर्फ प्रावधान का उल्लेख न करने के आधार पर प्रस्ताव को गैर कानूनी नहीं ठहराया जा सकता
4. सीबीआइ के गठन को चुनौती देने वाली ऐसी ही याचिकाएं राजस्थान हाईकोर्ट खारिज कर चुका है और सुप्रीम कोर्ट भी उन पर मुहर लगा चुका है
5. सुप्रीम कोर्ट की संविधानपीठ डीएसपीई एक्ट को संवैधानिक ठहरा चुकी है। कई फैसलों में वह इसका उल्लेख कर चुका है।
हाई कोर्ट में सरकार ने नहीं किया था सीबीआइ का बचाव
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सीबीआइ को संकट से बचाने के लिए सरकार भले ही एक दिन में ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हो, लेकिन इसी सरकार ने दो साल पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट में जांच एजेंसी के पक्ष में खड़े होने की जहमत नहीं उठाई थी। सीबीआइ की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के पहले हाई कोर्ट ने कार्मिक मंत्रालय को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। लेकिन केंद्र सरकार मुद्दे की गंभीरता को समझने में बुरी तरह विफल रही।
सरकार के रवैये से नाराज सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गुवाहाटी हाई कोर्ट में यदि सरकार याचिका का विरोध करती तो ऐसी नौबत ही नहीं आती। उनके अनुसार हाई कोर्ट से आए नोटिस को कार्मिक मंत्रालय के एक अनु सचिव (अंडर सेक्रेटरी) ने सीबीआइ के पास भेज दिया। सीबीआइ ने अपनी ओर से हाई कोर्ट में याचिका का विरोध भी किया, लेकिन वहां सीबीआइ के अधिकार क्षेत्र को नहीं, बल्कि उसके गठन को चुनौती दी गई थी। केंद्र सरकार ही हाई कोर्ट में यह साफ कर सकती थी कि किस तरह सीबीआइ का गठन कानून सम्मत है। जाहिर है सरकार यदि दो साल पहले यही तत्परता दिखाती तो ऐसी नौबत ही नहीं आती।
सीबीआइ पर सवाल उठाने के गंभीर परिणाम संभव
जागरण ब्यूरो, जम्मू। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सीबीआइ के अस्तित्व पर गुवाहाटी उच्च न्यायालय की तरफ से दिए गए आदेश पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश की अहम जांच एजेंसी पर सवाल उठने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
सीबीआइ को संवैधानिक दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार को कदम उठाने चाहिए।
सतवारी-कुंजवानी फोरलेन मार्ग का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है। सीबीआइ एक अहम जांच एजेंसी है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश के बाद केंद्र सरकार के पास सर्वोच्च न्यायालय के पास जाने का रास्ता है। सरकार सर्वोच्च न्यायालय से स्टे हासिल कर सकती है या आर्डर तबदील करवा सकती है।
मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर
