यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 21, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
राडिया टेप मामला: रतन टाटा खुद पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष रतन टाटा अपनी याचिका पर चल रही बहस सुनने के लिए खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। ...और पढ़ें

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष रतन टाटा अपनी याचिका पर चल रही बहस सुनने के लिए खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। टाटा ने निजता के अधिकार की दुहाई देते हुए कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के साथ उनकी निजी बातचीत को सार्वजनिक करने पर रोक लगाने की मांग की है। बुधवार को टाटा के वकील हरीश साल्वे ने टेप लीक मामले की जांच में सरकार पर शिथिलता बरतने का आरोप लगाया और फोन टैपिंग के मामलों की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने का सुझाव दिया।
मामला राडिया की उद्योगपतियों, नेताओं, पत्रकारों और अन्य लोगों से हुई बातचीत के टेप लीक होने से संबंधित है। सरकार को मिली शिकायत के बाद राडिया का फोन टेप किया गया था। एक गैरसरकारी संगठन ने भी अर्जी दाखिल कर टेप में दर्ज बातचीत की जांच करने और उसमें आपराधिक अंश पाए जाने पर कार्यवाही की मांग की है। हरीश साल्वे ने कहा कि बातचीत के टेप लीक होने से दुरुपयोग की भी आशंका रहेगी। साल्वे ने राडिया फोन टैपिंग मामले में सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुल 5008 घंटे की रिकार्डिग है। उसे सुना भी नहीं गया और टेप सीबीआइ को दे दिया गया। सुने बिना इतनी लंबी रिकार्डिग जारी रखी गई। टेप को सुना जाना चाहिए था। अगर उसमें कुछ गलत पाया जाता, तो उसे कार्यवाही के लिए भेजा जाना चाहिए था। अगर गलत नहीं था, तो टेप नष्ट किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार के वकील से फोन रिकार्डिग के दो मूल आदेशों की प्रति साल्वे को उपलब्ध कराने को कहा। साल्वे ने सुझाव दिया कि एक स्थायी स्वतंत्र समीक्षा समिति होनी चाहिए, जो बातचीत की समय-समय पर समीक्षा करे। सुनवाई के बाद टाटा संस ने कहा, 'रतन टाटा ने सिद्धांतों के तहत सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दाखिल की है। वह निजता के अधिकार को हर व्यक्ति का महत्वपूर्ण अधिकार मानते हैं। वह मामले की प्रगति पर लगातार निगाह रखे हुए हैं।'
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