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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 22, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

विरोध के बीच राहुल ने दंगा पीड़ितों को लगाया मरहम

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Published: Sun, 22 Dec 2013 01:24 PM (IST)Updated: Sun, 22 Dec 2013 09:34 PM (IST)

मुजफ्फरनगर [जेएनएन]। पश्चिम यूपी में भड़के दंगों के बाद पीड़ितों के लिए बने राहत शिविर इन दिनों राजनीति का केंद्र ...और पढ़ें

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मुजफ्फरनगर [जेएनएन]। पश्चिम यूपी में भड़के दंगों के बाद पीड़ितों के लिए बने राहत शिविर इन दिनों राजनीति का केंद्र बने हुए हैं। रविवार को इन राहत शिविरों का अचानक दौरा करने पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सभी को चौंका दिया। मुजफ्फरनगर और शामली में के राहत शिविरों में पीड़ितों का दर्द पूछने पहुंचे राहुल को विरोध भी झेलना पड़ा। कहीं महिलाओं और बच्चों ने उनकी गाड़ी रोक ली तो कहीं काले झंडे दिखाते हुए मुर्दाबाद के नारे लगाए। मुस्लिमों के विरोध को देखते हुए राहुल लोई शिविर में नहीं गए। राहुल जाटों को मरहम लगाने के मकसद से काकड़ा गांव भी गए।

रविवार शाम चार बजे अचानक बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह, यूपी कांग्रेस के प्रभारी मधूसूदन मिस्त्री सात सितंबर को महापंचायत से लौटते समय पुरबालियान गांव में हमले में मारे गए गांव काकड़ा निवासी मृतक राजबीर सिंह के घर पहुंचे। परिवारीजन और ग्रामीणों से बातचीत की। राहुल ने यहां ग्रामीणों से कहा, मैं हैरान हूं। शिविर में गया तो वहां लोग दूसरे संप्रदाय के साथ कोई दुश्मनी न होने की बात कह रहे हैं। आप लोगों की भी उनसे कोई दुश्मनी नहीं है तो आखिर इतना बड़ा दंगा क्यों और कैसे हो गया? प्रदेश के राजनेता मजा कर रहे हैं और यहां जनता परेशान है। राहुल गांधी ने ग्राम प्रधान रविंद्र चौधरी के आवास पर पहुंचकर बंद कमरे में गुफ्तगू भी की।

काकड़ा से मुजफ्फरनगर आते वक्त काफिले को ग्राम सांझक में ग्रामीणों ने सड़क पर धरना देकर रोक लिया। जाम लगाने वाले किनौनी के शरणार्थियों का कहना था कि उन्हें आज तक कोई मुआवजा नहीं मिला। बड़ी मुश्किल से एसपीजी ने उनकी गाड़ी को आगे निकाला।

उधर, शामली के कांधला में राहुल को आइएसआइ संबंधी बयान पर मुस्लिमों के गुस्से का शिकार होना पड़ा। उन्होंने काले झंडे दिखाए और मुर्दाबाद के नारे लगाए। आक्रोशित लोगों की पुलिस व कार्यकर्ताओं से हाथापाई हुई। शामली के मलकपुर, खुरगान, बरनावी, दभेड़ी खुर्द, अकबरपुर और सुन्हेड़ी के राहत शिविरों में राहुल पहुंचे। बरनावी और दभेड़ी खुर्द में भी शरणार्थियों ने राहुल का घेराव किया। देर शाम तक इंतजार करने के बावजूद लोई के दो हजार शरणार्थियों को मायूसी हाथ लगी। माना जा रहा है कि कांधला में लोगों का विरोध देख राहुल लोई के शिविर में नहीं पहुंचे।

मुजफ्फरनगर में पत्रकारों से राहुल ने कहा कि अब सपा सरकार दो काम करे। पहला, शिविरों की हालत सुधारे और दूसरा, दोनों वर्गो के बीच मध्यस्थता कर अमन कायम कराए।

मौतों पर राजनीति नहीं करती सपा : अखिलेश

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुजफ्फरनगर के दंगा राहत शिविरों पर राजनीति न करने की नसीहत देते हुए आह्वान किया कि यदि विपक्षी दलों के पास विस्थापित लोगों के पुनर्वास का कोई सुझाव हो तो उसका स्वागत है। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बोले कि समाजवादी पार्टी मौतों पर राजनीति नहीं करती। मुख्यमंत्री ने रविवार को यहां में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि शिविरों में हुई मौतों का सच जल्द ही सामने आ जाएगा। जांच कमेटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। राहत शिविरों में रह रहे जो लोग वापस अपने घर जाना चाहते हैं सरकार उनकी हर तरह से उनकी मदद कर रही है।

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