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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 05, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को सराहा, कहा-उनकी कथनी और करनी में नहीं है फर्क

By Lalit RaiEdited By:
Published: Sat, 05 Mar 2016 11:34 PM (IST)Updated: Sun, 06 Mar 2016 08:16 AM (IST)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष के चौतरफे हमले को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कुंद कर दिया है। देश भर में ...और पढ़ें

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष के चौतरफे हमले को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कुंद कर दिया है। देश भर में चुनी गई महिला सांसद और विधायकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा- प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता साफ दिखती है.वह जो कहते हैं, वो करते हैं। यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि मुख्य विपक्ष कांग्रेस नेतृत्व के निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री और उनके कामकाज का तौर तरीका ही रहा है।

महिलाओं को आरक्षण मिले बगैर सशक्तीकरण का सपना अधूरा-राष्ट्रपति

महिला सांसदों व विधायकों के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री की उपस्थिति की प्रसंशा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 'कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की कोई सक्रिय भूमिका नहीं है। उन्हें कुछ बोलना भी नहीं है। फिर भी वह एक घंटे से बैठे हैं। एक प्रधानमंत्री के लिए बहुत मुश्किल काम है। यह उनकी प्रतिबद्धता दिखाता है और बताता है कि वह जो कहते हैं, वह करेते भी हैं।' इस सिलसिले में उन्होंने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी योजनाओं की भी तारीफ करते हुए कहा कि यह महिलाओं के सच्चे रूप में सशक्तिकरण करने के लिए सरकार के समर्पण को दिखाता है।

संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व प्रदान करने वाले विधेयक को संसद में पास कराने में विफलता को राष्ट्रपति ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को इसे पारित कराने के लिए एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि यह उनका दायित्व है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दो तिहाई बहुमत से एक सदन में (लोकसभा) पारित होने के बाद भी महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं एवं परिषदों में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला विधेयक दूसरे सदन (राज्यसभा) में पारित नहीं हो सका है। राष्ट्रपति ने महिला आरक्षण को महिलाओं का सशक्तिकरण और संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की आबादी का 50 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है लेकिन आज भी हम संसद में इन्हें 12 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि पंचायतों और स्थानीय निकायों में 12.70 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं और वे काफी अच्छा काम कर रहीं हैं। कई राज्यों में पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है और कई राज्य इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी महिला आरक्षण की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह स्थानीय इकाइयों में महिलाओं की संख्या बढ़ी है, उस अनुपात में राज्य विधानसभाओं और संसद में महिला सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ी। हामिद ने कहा कि संसद में महिलाओं की संख्या केवल 12 फीसदी है, जो बहुत ही कम है। यह महिला आरक्षण विधेयक पास कराने से ही ठीक हो सकता है।