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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 09, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सहयोगियों की भी नजरों से गिरी कांग्रेस

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Published: Mon, 09 Dec 2013 05:22 PM (IST)Updated: Tue, 10 Dec 2013 10:14 AM (IST)

राजनीति वाकई अजब चीज है। चार राज्यों के चुनावों में कांग्रेस की मिट्टी क्या पलीद हुई कि वह केंद्र में ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, राजकेश्वर सिंह। राजनीति वाकई अजब चीज है। चार राज्यों के चुनावों में कांग्रेस की मिट्टी क्या पलीद हुई कि वह केंद्र में अपने सहयोगियों व समर्थकों की नजरों में भी गिर गई। साढ़े चार साल पहले जिन दलों ने अपने-अपने तर्क गढ़कर कांग्रेस की अगुआई में फिर से संप्रग सरकार बनवाई थी, अब वही उसे रीढ़विहीन, कमजोर बताने के साथ ही भला-बुरा कहने लगे हैं। पिछले दस साल से सरकार में शामिल राकांपा प्रमुख व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने तो घुमा-फिराकर सोनिया-मनमोहन पर ही अंगुली उठा दी है। सपा और बसपा भी उसकी कमियां गिनाने लगी हैं। कांग्रेस ने शरद पवार की टिप्पणी को खारिज कर दिया है। नेशनल कांफ्रेंस नेता व केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला ने हार के कारण तो गिनाए, लेकिन संप्रग सरकार का साथ छोड़ने से इन्कार कर दिया।

दिल्ली समेत चार राज्यों के चुनावों में कांग्रेस के सफाए से उखड़े केंद्रीय मंत्री शरद पवार संप्रग के ऐसे पहले नेता हैं जिन्होंने खुलकर कांग्रेस और सरकार पर हमला बोल दिया है। उन्होंने कहा कि जनता कमजोर नेतृत्व को नहीं चाहती। वह स्वर्गीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसी सख्त प्रशासक व फैसला लेने वाली नेता को चाहती है। चुनाव नतीजों का सबक यही है। युवा मतदाताओं ने अपने वोट के जरिए गुस्से का इजहार कर दिया है। कांग्रेस को हराने में युवा मतदाताओं ने बड़ी भूमिका निभाई है। लिहाजा कांग्रेस ही नहीं, बल्कि राकांपा जैसे बाकी दलों को भी इस बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। पवार ने अपने ब्लॉग में संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुआई वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) का नाम लिए बगैर उसकी भी आलोचना की। उन्होंने कहा, 'गरीबों के हितों से जुड़े फैसले लेने के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसी मजबूत नेता ने कभी भी 'झोलावालों' (गैरसरकारी संगठनों) से सलाह लेने की जरूरत महसूस नहीं की। ये झोलावाले जमीनी सच्चाई से इतर विचार लेकर आते हैं, जिन्हें मीडिया और सरकार में भी लोग तरजीह दे रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता मीम अफजल ने पवार के हमले पर कहा कि पार्टी मीडिया के जरिये अपने सहयोगियों से बात नहीं करती।

सरकार को समर्थन कर रही बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, 'अगर पहले से पता होता कि कांग्रेस इतनी बुरी तरह हारेगी तो हम अपनी चुनावी रणनीति बदल देते। महंगाई हार की बड़ी वजह रही।' नतीजों से बसपा को मिले सबक पर उन्होंने कहा, 'हम तो बाहर से समर्थन कर रहे हैं। पवार की तरह सरकार में शामिल नहीं हैं।' राज्यसभा में सपा संसदीय दल के नेता प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा, 'कांग्रेस की दुर्गति के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। महंगाई व भ्रष्टाचार केंद्र की पहचान बन गई है। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी) ने इन्हीं मुद्दों पर घर्ष किया। मौजूदा राजनीतिक दलों आजिज जनता ने उन्हें महसूस किया। जनता को पहले से इसका अंदाजा होता तो उसकी जीत और बड़ी होती।'

'कमजोर नेतृत्व नहीं, इंदिरा गांधी जैसा सख्त व फैसला लेने वाला नेता चाहती है जनता।'

-शरद पवार, एनसीपी अध्यक्ष

'कांग्रेस की इतनी बुरी हार का पहले से पता होता तो बसपा बदल देती अपनी रणनीति।'

-मायावती, बसपा अध्यक्ष

'केंद्र में बैठी सरकार के कारण राज्यों में हारी कांग्रेस। महंगाई और भ्रष्टाचार केंद्र की पहचान बन गई है।'

-प्रो. रामगोपाल यादव, सपा महासचिव

'नेशनल कांफ्रेंस संप्रग को समर्थन जारी रखेगी। हार का मतलब यह नहीं कि मुश्किल हालात में साथ छोड़ दिया जाए।'

-फारूक अब्दुल्ला, केंद्रीय मंत्री

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