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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जम्मू-कश्मीर से रोहिंग्या मुस्लिमों की वापसी में सियासी अड़चनें

By Bhupendra SinghEdited By:
Published: Tue, 05 Sep 2017 06:42 AM (IST)

जम्मू में चोरी छिपे म्यांमार से आकर बसे रोहिंग्या मुसलमानों की जल्द वापसी में सियासी अड़चनें बाधा बन रही हैं।

जम्मू-कश्मीर से रोहिंग्या मुस्लिमों की वापसी में सियासी अड़चनें
जम्मू-कश्मीर से रोहिंग्या मुस्लिमों की वापसी में सियासी अड़चनें

राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू में चोरी छिपे म्यांमार से आकर बसे रोहिंग्या मुसलमानों की जल्द वापसी में सियासी अड़चनें बाधा बन रही हैं। इस मामले में सरकार का मंत्रिसमूह चार महीने में सिर्फ दो बैठकें ही कर पाया है।म्यांमार से आए रोहिंग्या व बांग्लादेशी नागरिकों के बसने को लेकर जम्मू व कश्मीर में सोच में फर्क ने सरकार के काम करने की गति कम कर दी है। जम्मू में उन्हें बसाने को जनसांख्यिकी स्वरूप बदलने की साजिश से जोड़ा जा रहा है।

सरकार का मंत्रिसमूह चार महीने में सिर्फ दो ही बैठकें कर सका

कश्मीर केंद्रित पार्टियां जम्मू में बसने को मानती है मानवीय मसला

 कश्मीर केंद्रित पार्टियां उनके जम्मू में बसने को मानवीय मसला मानती है। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि यहां पिछली सरकारों के कार्यकाल में इन विदेशी नागरिकों में कुछ राज्य में बसने के लिए फर्जी कागजात बना चुके हैं। वहीं, कुछ के तार आतंकवाद से जुड़े होने की भी पुष्टि हुई है। 2015 में कश्मीर में मारे गए दो विदेशी आतंकियों में से एक की पहचान म्यांमार के नागरिक के रूप में हुई थी।

 इन हालात में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर के जम्मू दौरे के बाद रोहिंग्या, बांग्लादेशी मुस्लिमों की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया जोर पकड़ रही है। ऐसे में मंत्रिसमूह की तीसरी बैठक में स्थिति स्पष्ट हो सकती है कि विदेशी नागरिकों के जम्मू में बसने की चुनौती कितनी गंभीर है।

 इस समय खुफिया एजेंसियां इन विदेशी नागरिकों की कुल संख्या, काम धंधे संबंधी आंकड़े एकत्र कर रही है। जम्मू में रोहिंग्या व बांग्लादेशी नागरिकों की कुल संख्या पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जम्मू में बसने वाले रोहिंग्याओं की संख्या करीब 5600 है। वहीं, बिजली विभाग की ओर से ऐसे विदेशी नागरिकों को दिए गए बिजली कनेक्शन कुछ और ही तस्वीर पेश करते हैं। बिजली विभाग के अनुसार अन्य देशों से आए इन लोगों को वर्ष 2008 से 2017 के बीच 7273 बिजली कनेक्शन दिए गए हैं।

 इस मुद्दे पर बने सरकार के मंत्रिसमूह के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह का कहना है कि रोहिंग्या, बांग्लादेशी विदेशी नागरिक हैं और उन्हें वापस जाना है। यह मसला संवेदनशील है। जल्द इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई करने के लिए तीसरी बैठक होगी।