सूखे के खतरे के बीच किसानों का सहारा बनेगी फसल बीमा योजना, इस बार 11 लाख अधिक अन्नदाताओं ने कराया कवरेज
मानसून की कमजोरी और सूखे के खतरे के बीच, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच ...और पढ़ें

सूखे के संकट में किसानों का सहारा बनी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
HighLights
मानसून की कमजोरी से फसल नुकसान का खतरा बढ़ा।
पीएम फसल बीमा योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच।
इस साल 11 लाख अधिक किसानों ने कराया बीमा।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मानसून के कमजोर रहने से देश के बड़े हिस्से में फसल नुकसान का खतरा बढ़ गया है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बन सकती है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार इस साल खरीफ में 2.41 करोड़ किसानों ने 2.78 करोड़ हेक्टेयर से अधिक फसल का बीमा कराया है। पिछले वर्ष खरीफ में 2.30 करोड़ किसान बीमित थे। जाहिर है, करीब 11 लाख किसानों ने इस बार ज्यादा बीमा कराया है। इस बार फसल बीमा की जरूरत इसलिए भी अधिक है, क्योंकि मानसून सीजन में देश के 38 प्रतिशत जिले सूखा प्रभावित हैं।
बाढ़ और सुखाड़ दोनों ही परिस्थितियों में किसानों के नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। उपज में कमी के अलावा प्रतिकूल मौसम के कारण बुआई नहीं हो पाने की स्थिति भी इस बीमा के दायरे में आती है। अधिसूचित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बुआई रुकने पर बीमित राशि के अधिकतम 25 प्रतिशत तक भुगतान का प्रविधान है।
किसान के लिए प्रीमियम भी सीमित है। खरीफ की खाद्यान्न और तिलहन फसलों पर अधिकतम दो प्रतिशत, रबी पर 1.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों पर अधिकतम पांच प्रतिशत प्रीमियम देना होता है। बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती हैं।
खड़ी फसल में नुकसान का आकलन अधिसूचित क्षेत्र के आधार पर होता है। राज्य की ओर से फसल कटाई प्रयोगों और नुकसान के आंकड़े उपलब्ध कराए जाते हैं। वास्तविक पैदावार तय सीमा से नीचे जाने पर बीमा दावा तय होता है। इसलिए केवल किसी किसान के खेत में कम बारिश होना ही पर्याप्त नहीं है। बीमित क्षेत्र में प्रक्रिया के अनुसार नुकसान साबित होना भी जरूरी होता है।
फसल बीमा योजना के तहत कोई भी प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र अपने आप ही राहत में नहीं बदलता है। इसके लिए सर्वे, राज्य सरकार की अधिसूचना, उपज के आंकड़े और दावा भुगतान की गति ही तय करती है कि बीमित किसान को संकट के समय कितना पैसा और कितनी जल्दी मिलता है।
अगर लंबे शुष्क दौर या गंभीर सूखे से फसल को मौसम के बीच ही भारी क्षति होती है तो किसानों के खाते में अग्रिम भुगतान का प्रविधान है। नियमों के अनुसार दावे का 25 प्रतिशत तक भुगतान किया जा सकता है, जिसे बाद में अंतिम दावे में समायोजित किया जाता है। इसमें जिला स्तर पर क्षति का आकलन के साथ राज्य की अधिसूचना महत्वपूर्ण है।
