यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 17, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
केंद्रीय विद्यालय में दाखिला सिर्फ गरीब बच्चों को
सांसदों को कह दिया गया है कि वे सिर्फ उन्हीं बच्चों के दाखिले के लिए अपनी सिफारिश भेजें जिनकी सालाना पारिवारिक आय पांच लाख रुपये से कम हो।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश भर के एक हजार से ज्यादा केंद्रीय विद्यालयों में केंद्रीय कर्मियों के बच्चों के अलावा अब सिर्फ गरीब बच्चों को ही दाखिला मिल पाएगा। सांसदों को कह दिया गया है कि वे सिर्फ उन्हीं बच्चों के दाखिले के लिए अपनी सिफारिश भेजें जिनकी सालाना पारिवारिक आय पांच लाख रुपये से कम हो। अब तक सांसद कोटा में आय वर्ग को ले कर कोई शर्त नहीं थी।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की ओर से सांसदों को भेजे पत्र में कहा गया है, 'आपसे अनुरोध किया जाता है कि आप सिर्फ उन्हीं छात्रों के नाम भेजें, जिनके अभिभावकों की सालाना आय पांच लाख रुपये से कम है। क्योंकि हमें समाज के निचली आय वर्ग के लोगों का ध्यान रखना है।' इसी तरह सांसदों को दाखिले की सिफारिशें अप्रैल के पहले सप्ताह तक ही जमा करवा देने को कहा गया है ताकि अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र में छात्र आरंभ से ही भाग ले सके। हालांकि सांसदों के इन कूपन को जमा करने की अंतिम तारीख अब भी 30 जून रहेगी।
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'दैनिक जागरण' ने 27 दिसंबर को प्रकाशित अपनी खबर में बता दिया था कि सांसदों के लिए बनाई गई विशेष छूट प्रवेश योजना को पूरी तरह उनकी मर्जी पर छोड़ने की बजाय यह तय कर दिया जाएगा कि ये सिर्फ गरीब बच्चों के लिए ही सिफारिश कर सकेंगे। मंत्रालय की ओर से सांसदों को यह अनुरोध भी किया गया है कि वे एक ही केंद्रीय विद्यालय और एक ही क्लास के लिए ज्यादा सिफारिशें देने से बचें ताकि एक ही क्लास में छात्रों की संख्या ज्यादा नहीं बढ़ जाए। इसकी बजाय वे अपनी सिफारिशें अलग-अलग केंद्रीय विद्यालयों के लिए भेजें। सांसद कोटा के तहत होने वाले दाखिले के लिए क्लास में अतिरिक्त सीटें बढ़ाई जाती हैं।
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देश भर में एक हजार से ज्यादा केंद्रीय विद्यालयों में 12 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। अभी सांसदों को अपने क्षेत्र के किसी भी दस बच्चों के दाखिले की सिफारिश करने का विशेषाधिकार हासिल है। इस वर्ष से केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है। इस प्रक्रिया के तहत 15 मार्च तक देश भर से पहली कक्षा में 6.47 लाख आवेदन मिले हैं। इन आवेदनों में सबसे अधिक दिल्ली के हैं। राष्ट्रीय राजधानी के केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले के लिए 1.23 लाख आवेदन मिले हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश है, जहां से 70,533 आवेदन मिले हैं। बिहार से लगभग 20 हजार, चंडीगढ़ से तीन हजार, हरियाणा से 14 हजार, झारखंड से छह हजार, उत्तराखंड से सात हजार और पश्चिम बंगाल से 32 हजार आवेदन मिले हैं।
