यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 31, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सिर्फ 40 फीसदी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट को मिलती है नौकरी
मानव संसाधन विकास मंत्री जावडेकर ने स्वीकार किया कि पढ़ाई पूरी होने के बावजूद 60 फीसद इंजीनियरिंग ग्रेजुएट बेरोजगार रह ...और पढ़ें

नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार ने यह स्वीकार किया कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिर्फ 40 फीसद इंजीनियरिंग ग्रेजुएट को ही रोजगार ([प्लेसमेंट)] मिल पाता है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने राज्यसभा में पूरक प्रश्नों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस धुंधली तस्वीर को बेहतर करने के लिए एआईसीटीई ने 75 फीसद छात्रों के लिए ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप तथा अद्यतन आदर्श पाठयक्रम शुरू करने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अगले पांच वर्ष में कम से कम 60 फीसद इंजीनियरिंग छात्रों को रोजगार योग्य बनाने का लक्ष्य बनाया है।
प्रश्नकाल में पूरक सवाल पूछते हुए विभिन्न सदस्यों ने इंजीनियरिंग एवं शिक्षक-प्रशिक्षण ([बीएड)] कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ([एआईसीटीई)] के एक ताजा अध्ययन के अनुसार केवल 40 प्रतिशत इंजीनियरिंग छात्र ही रोजगार के योग्य हैं। जावडेकर ने कहा कि सरकार की योजना अगले पांच साल में इस आंकड़े को 40 से बढ़ाकर 60 फीसद करना है। उन्होंने कहा कि कम से कम 75 फीसद छात्रों के लिए ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप के मकसद से एक योजना लागू की जा रही है ताकि छात्रों को उद्योग के लिए तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि पुराने पाठयक्रम की जगह एआईसीटीई ने अपनी वेबसाइट पर आदर्श पाठयक्रम डाल दिया है, जिसे समय-समय पर अपडेट किया जाएगा।
मंत्री द्वारा दिए गए ब्यौरे के अनुसार साल 2016-17 में देश भर में 8,409 मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, जिनमें 31.72 लाख छात्र तथा 6.47 लाख शिक्षक हैं। साल 2015-16 में 8,552 मान्यता प्राप्त कॉलेज थे, जिनमें 33.23 लाख सीटें थीं लेकिन वास्तविक दाखिला 16.62 लाख ही हुआ। बीएड कॉलेजों के बारे में उन्होंने बताया कि वहां शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर काफी शिकायतें हैं, इसलिए मंत्रालय ने उनसे शिक्षकों की संख्या, वेतन, बुनियादी ढांचा आदि के बारे में हलफनामा देने को कहा है।
करीब 6,300 संस्थानों ने फीडबैक दिया है, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। जबकि विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराने वाले सैंकड़ों कॉलेजों को नोटिस देकर पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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