महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रोटोकॉल की मांग पर केंद्र को नोटिस, तीन नवंबर को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कानून-व्यवस्था और विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए एक समान प्रोटोकॉल की मांग ...और पढ़ें

महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रोटोकॉल की मांग पर केंद्र को नोटिस।
HighLights
महिला पुलिस सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस दिया।
कानून-व्यवस्था ड्यूटी, विरोध प्रदर्शनों में महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा।
यौन उत्पीड़न, डिजिटल साक्ष्य के प्रमाणीकरण पर भी विचार होगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में कानून-व्यवस्था की ड्यूटी और विरोध प्रदर्शनों के प्रबंधन के दौरान तैनात महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए एक समान प्रोटोकॉल की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अधिवक्ता आशीष गोपाल गर्ग द्वारा दायर याचिका पर यह नोटिस जारी किया। कोर्ट ने इस मामले को लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न करते हुए अगली सुनवाई तीन नवंबर को तय की है।
याचिका में दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़े हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिला अधिकारियों और कॉन्स्टेबलों समेत पुलिसकर्मियों पर हुई हिंसा का हवाला दिया गया है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि महिला पुलिसकर्मियों को अक्सर अत्यधिक भीड़भाड़ वाली और अस्थिर स्थितियों में तैनात किया जाता है, जहां उन्हें विशिष्ट जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
याचिका में एक व्यापक 'महिला पुलिसकर्मी सुरक्षा और विरोध प्रबंधन प्रोटोकॉल' तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है, जो फील्ड में यौन उत्पीड़न की शिकायतों के प्रभावी निवारण और पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतों की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करे।
याचिका में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली एआई-जनित और हेरफेर की गई डिजिटल सामग्रियों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।
इसमें मांग की गई है कि अदालतों या जांच एजेंसियों द्वारा साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच से पहले किसी भी मनगढ़ंत सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सीसीटीवी फुटेज, बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग, कंट्रोल रूम के फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित व प्रमाणित किया जाए।
याचिका के अनुसार, संवैधानिक ढांचे के तहत शांतिपूर्ण सभाओं की सुरक्षा और कानून के अनुसार हिंसा तथा यौन दुराचार से निपटने के लिए विश्वसनीय साक्ष्यों का होना अनिवार्य है।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
