यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 06, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
केरल के वैज्ञानिक ने विकसित की आपात निकास प्रणाली
वैज्ञानिक ने ऊंची इमारतों में आग लगने पर या अन्य आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने की एक नई प्रणाली विकसित की है।

अलपुझा। केरल के एक शौकिया वैज्ञानिक ने ऊंची इमारतों में आग लगने पर या अन्य आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने की एक नई प्रणाली विकसित की है। मुंबई स्थित भाभा परमाणु शोध केंद्र (बीएआरसी) उनके इस आविष्कार का निरीक्षण करेगा।
एमसी डेविड ने बताया कि बीएआरसी का एक दल उनके इस आविष्कार के निरीक्षण करने के लिए यहां आएगा। उन्हें दिखाने के लिए एक मॉडल तैयार कर लिया गया है। कायमकुलम निवासी 60 वर्षीय डेविड ने बताया उनका आविष्कार सामान्य स्पाइरल फिलसने वाली गाड़ी है। इससे ऊंची इमारतों में फंसे लोगों की जल्द सुरक्षित निकासी में आसानी होती है। इसे फाइबर ग्लास या कंक्रीट से बनाया जा सकता है।
इमारत की सीढ़ियों के बगल में इसका निर्माण हो सकता है। ऊंची इमारतों में आग लगने पर लोग फिसलने वाली गाड़ी में सीढ़ी के मुकाबले चार गुना तेजी ने ग्राउंड फ्लोर पर आ जाएंगे। फाइबर ग्लास गाड़ी के निर्माण में हर फ्लोर के लिए करीब 50 हजार रुपये का खर्च आएगा। जबकि कंक्रीट वाली गाड़ी इससे थोड़ी महंगी पड़ेगी।
