यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 08, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सात साल बाद हाथ में आई कर्नाटक की सत्ता
बेंगलूर। सात साल के वनवास के बाद अपने पुराने दक्षिणी दुर्ग में कांग्रेस की वापसी हो गई है। भ्रष्टाचार के ...और पढ़ें

बेंगलूर। सात साल के वनवास के बाद अपने पुराने दक्षिणी दुर्ग में कांग्रेस की वापसी हो गई है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लड़े गए कर्नाटक विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की नजरें थीं। बुधवार को घोषित नतीजों में कांग्रेस ने भाजपा और जद[एस] को करारी शिकस्त देते हुए स्पष्ट बहुमत के आंकड़ें को पार कर लिया।
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राष्ट्रीय स्तर पर घोटालों के आरोपों से घिरी कांग्रेस ने 224 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 121 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के मुद्दों पर घिरी भाजपा को मात्र 40 सीटों पर जीत नसीब हुई है। 2008 के पिछले चुनाव में भाजपा को 110 सीटें मिलीं थीं। इसी तरह जद(एस) के प्रदर्शन में खास सुधार नहीं दिखा। उसने 40 सीटों पर विजय का स्वाद चखा। गत चुनाव में उसे 28 सीटों मिलें थीं। भाजपा और जद(एस) के बीच मुख्य विपक्ष के लिए मुकाबला बराबरी पर है। उधर, पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दयुरप्पा की पार्टी केजेपी छह सीटों के साथ कुछ खास कमाल नहीं कर पाई। उसकी उपलब्धि यह रही कि उसने भाजपा को जख्मी कर दिया। भाजपा के पूर्व मंत्री और बेल्लारी बंधुओं के करीबी माने जाने वाले श्रीरामुलु की बीएसआर-कांग्रेस ने भी भाजपा का वोट काटते हुए चार सीटें जीतीं। समाजवादी पार्टी ने एक सीट के साथ यहां खाता खोल दिया।
बड़े नेताओं में मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार (हुबली-धारवाड सेंट्रल), येद्दयुरप्पा (शिकारीपुरा), सिद्दरमैया (वरुणा) और एचडी कुमारस्वामी (रामनगरम) को जीत मिली जबकि राज्य कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री पद के दावेदार परमेश्वरा (कोरागेरे) को जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा। कुमारस्वामी की पत्नी अनीता और येद्दयुरप्पा की करीबी शोभा करंदलाजे भी पराजित हो गई। बता दें कि कुल 223 सीटों पर मतदाताओं ने अपना फैसला सुना दिया है। जबकि भाजपा प्रत्याशी के निधन के कारण मैसूर जिले की पेरियापटना विधानसभा सीट पर चुनाव 28 मई को होगा। भाजपा को दक्षिणी कन्नड़ और उडुपी के समुद्र तटीय जिलों में जबरदस्त हार मिली, जहां पार्टी का मजबूत आधार था। इनके अलावा येद्दयुरप्पा के गृह जिले शिमोगा और बेल्लारी में भी पार्टी को निराशा हाथ लगी। शिमोगा से तो पार्टी की राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री के ईश्वरप्पा को हार का मुंह देखना पड़ा। गौरतलब है कि कर्नाटक में 2004 तक कांग्रेस अपने बूते सरकार में थी। इसके बाद जद(एस) के साथ मिलकर 2006 तक सरकार में रही।
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