जब नहीं मिला स्टेनोग्राफर, तो जज ने खुद हाथ से लिख डाले 159 फैसले, राजस्थान से आया हैरान करने वाला मामला
अपने फैसलों को लेकर चर्चा में रहे राजस्थान के सेवानिवृत जज दिनेश गुप्ता ने सेवानिवृति के एक दिन बाद कहा ...और पढ़ें

स्टेनोग्राफर नहीं मिला तो जज ने हाथ से लिखे 159 फैसले
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स्टेनोग्राफर नहीं मिला तो जज ने हाथ से लिखे 159 फैसले
राजस्थान के सेवानिवृत जज दिनेश गुप्ता ने किया दावा
जागरण संवाददाता, जयपुर। अपने फैसलों को लेकर चर्चा में रहे राजस्थान के सेवानिवृत जज दिनेश गुप्ता ने सेवानिवृति के एक दिन बाद कहा कि डेढ़ महीने तक स्टेनोग्राफर की सुविधा नहीं मिलने के कारण 159 फैसले उन्होंने खुद अपने हाथ से लिखे हैं।
उन्होंने कहा कि 13 अगस्त को उनके कोर्ट का स्टेनोग्राफर बकाया भुगतान नहीं मिलने के कारण काम छोड़कर चला गया। इसके वाद दूसरा स्टेनोग्राफर नहीं मिला।
इस कारण उन्होंने 29 सितंबर तक 159 फैसले खुद अपने हाथ से लिखे हैं। अपनी परेशानी लेकर वह सर्वोच्च न्यायालय भी पहुंचे, लेकिन वहां उनकी सेवानिवृति के चार दिन पहले मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी बात रखने के लिए कहा गया। जयपुर स्थित श्रम न्यायालय-प्रथम में वह 30 सितंबर को सेवानिवृत हुए।
उन्होंने कहा कि जिला अदालतों में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उल्लेखनीय है कि कार्मिशियल न्यायालय में गुप्ता ने अड़ानी समृह के खिलाफ फैसला दिया था। इसके बाद उन्का जयपुर से ब्यावर तबादला कर दिया गया था। वहां से कुछ दिन बाद उन्हें जालौर भेज दिया गया।
उच्च न्यायालय के इस प्रशासनिक आदेश के खिलाफ गुप्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि सेवानिवृति के 10 माह पहले बार-बार तबादले कर उन्हें परेशान किया जा रहा है।
इंटरनेट मीडिया पर नहीं होना चाहिए जजों का ट्रायल : जस्टिस शर्मा
राजस्थान हाई कोर्ट के सेवानिवृत कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस संदीप मेहता की ओर से स्वयं पर लगाए गए आरोपों पर कहा कि मैंने सीजेआई को पत्र लिखकर यह मुद्दा उठाया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट का कोई जज हाई कोर्ट के मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है।
जजों के बीच आपस में इस तरह के प्रशासनिक मुद्दे पहले भी कई बार उठे हैं लेकिन यह कभी अखबारों की सुर्खियों में नहीं आया। कोई भी इंटरनेट मीडिया पर नहीं जाता। जजों का ट्रायल इंटरनेट मीडिया पर नहीं होना चाहिए।
बता दें कि जस्टिस मेहता ने अगस्त में सीजेआइ को भेजे गए पत्रों में जस्टिस शर्मा पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।
उन्होंने दावा किया था कि उन्हें कई शिकायतें मिली हैं, जो जस्टिस शर्मा की ईमानदारी और सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाती हैं। इसके आधार पर जस्टिस संदीप मेहता ने जस्टिस शर्मा को किसी अन्य हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने और एक नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग की थी।
