यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 18, 2012 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
छुंट्टी नहीं मिली तो टॉवर पर चढ़ा फौजी
सेना के अधिकारियों पर मनमानी करने व छुंट्टी न देने का आरोप लगाते हुए एक फौजी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन ...और पढ़ें

नई दिल्ली। सेना के अधिकारियों पर मनमानी करने व छुंट्टी न देने का आरोप लगाते हुए एक फौजी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के समीप स्थित रेलवे के टेलीफोन टॉवर पर चढ़ गया। तकरीबन सौ फुट ऊंचे टॉवर पर चढ़कर उसने अपना मांग पत्र लोगों को दिया। मांग पत्र में उसने अधिकारियों द्वारा प्रताड़ना की कहानी लिखी है। देर रात उसे उतारने की कोशिश जारी थी। फौजी का कहना है कि जब तक इस मामले में रक्षा मंत्री हस्तक्षेप नहीं करेंगे, वह नीचे नहीं आएगा।
जवान का कहना है कि सेना में अधिकारियों की हिटलरशाही चलती है। उनकी बात न मानने पर जवानों पर तरह-तरह के सितम ढाए जाते हैं। पिता की मौत होने पर उसने तीन दिन की छुंट्टी मांगी थी, लेकिन एक दिन की छुंट्टी दी गई। वापस लौटने पर उसका स्थानांतरण करने के साथ ही तरह-तरह से परेशान किया जाने लगा। तमिलनाडु निवासी के मुथू 1998 में सेना में खेल कोटे से भर्ती हुआ था। वर्तमान में राजस्थान के कोटा में तैनात है।
जुलाई से ही वह बगैर छुट्टी की स्वीकृति के यूनिट से गायब है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वह बेंगलूर से स्पाइस जेट के विमान से शुक्रवार को राजधानी पहुंचा। दिल्ली आने के बाद वह सीधा मिंटो रोड आया और टावर पर चढ़ गया।
फायर अधिकारी एमके चटोपाध्याय ने बताया कि घटना की सूचना पीसीआर से उन्हें एक बजे मिली थी। इसके बाद से ही हाइड्रोलिक प्लेटफार्म के माध्यम से विभाग के छह कर्मी उसे उतारने के प्रयास में लगे थे। सूचना के बाद सेना के वरिष्ठ अधिकारी ब्रिगेडियर व कमाडेंट भी वहा पहुंच गए थे। उन्होंने फोन से फौजी से बात की और उसे समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। लेकिन उस पर अधिकारियों की बात का कोई असर नहीं हुआ। बताया जाता है कि जवान पहले भी बेंगलूर में अपनी मागों को लेकर टावर पर चढ़ गया था। पाच पन्ने के माग पत्र में के. मुथू ने सेना के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उसका कहना है कि बेंगलूर पोस्टिंग के दौरान अधिकारियों ने उसके साथ काफी गलत व्यवहार किया। उसने अपने पत्र में अधिकारियों द्वारा मारपीट की बात भी लिखी है। उसका कहना है कि वह जब इसकी शिकायत लेकर उच्च अधिकारी के पास गया तो उन्होंने भी कोई कार्रवाई नहीं की।
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