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रोजगार आंकड़ों में पुरुषों और महिलाओं की हिस्सेदारी में बड़ा अंतर, किस जिले में सबसे ज्यादा कामकाजी महिलाएं?

Published: Fri, 18 Sep 2026 11:10 PM (IST)

सरकार ने पहली बार जिलास्तरीय श्रम बाजार के अनुमान जारी किए हैं, जिसमें रोजगार में पुरुषों और महिलाओं की हिस्सेदारी में बड़ा अंतर सामने आया है।

सरकार ने पहली बार जिलास्तरीय श्रम बाजार अनुमान जारी किए

सरकार ने पहली बार जिलास्तरीय श्रम बाजार अनुमान जारी किए

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सरकार ने शुक्रवार को पहली बार जिलास्तरीय श्रम बाजार के अनुमान जारी किए, जिसमें देशभर में रोजगार में महिलाओं और पुरुषों की हिस्सेदारी में बड़ा अंतर दिखाई दिया।

लगभग 58 प्रतिशत जिलों में महिला श्रम बल हिस्सेदारी कम से कम 40 प्रतिशत दर्ज किया गया और देश के ज्यादातर हिस्सों में बेरोजगारी दर 0.5 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत के बीच रही।

नए आवधिक श्रम बल सर्वे (पीएलएफएस) के तहत जारी किए गए आंकड़ों में पहली बार श्रम बल हिस्सेदारी दर (एलएफपीआर), श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्यूपीआर), बेरोजगारी दर (यूआर) और एनईईटी (शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण में शामिल न होने वाले युवा) के जिलास्तरीय अनुमान जारी किए गए हैं।

प्रत्येक राज्य के 10 सबसे ज्यादा आबादी वाले जिलों में से महिला आबादी के हिसाब से चुने गए जिलों में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में सबसे ज्यादा 80.9 प्रतिशत महिलाओं की श्रमबल हिस्सेदारी दर्ज की गई।

इसके बाद जम्मू-कश्मीर के बडगाम में 71.4 प्रतिशत, ओडिशा के मयूरभंज में 71.8 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ के सरगुजा में 69 प्रतिशत महिलाएं एलएफपीआर में दर्ज की गईं।

सबसे नीचे पूर्वी दिल्ली में 18.9 प्रतिशत, बिहार के सीवान में 24.7 प्रतिशत और पंजाब के पटियाला में 39.3 प्रतिशत महिलाएं एलएफपीआर में दर्ज की गईं।

कुल मिलाकर, लगभग 57.8 प्रतिशत जिलो में महिलाओं का एलएफपीआर 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा दर्ज किया गया जो अलग-अलग इलाकों में श्रम बाजार में महिलाओं के जुड़ाव में अंतर दिखाता है।

सूरत में श्रमबल हिस्सेदारी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात सबसे ज्यादा बड़े जिलों की बात करें तो गुजरात के सूरत की श्रमबल हिस्सेदारी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात सबसे ज्यादा क्रमश: 68.6 प्रतिशत और 67.8 प्रतिशत रहे। इसके बार बिहार के अररिया और तमिलनाडु में सलेम का स्थान रहा।

इन दोनों ही श्रेणियों में बिहार का दरभंगा सबसे नीचे रहा। तीन चौथाई से ज्यादा जिलों ने एनईईटी (यानी 15-29 साल के उन युवाओं का हिस्सा जो नौकरी, पढ़ाई या ट्रेनिंग में नहीं हैं) दर 30 प्रतिशत से कम बताई।

देशभर के लगभग 98 प्रतिशत जिलों में 15 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों की श्रमबल हिस्सेदारी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात 40-80 प्रतिशत के बीच रहा। 100 सबसे ज्यादा आबादी वाले जिलों में श्रमिक जनसंख्या अनुपात 37.3 प्रतिशत से 76.7 प्रतिशत के बीच था।

आधे से ज्यादा जिलों में श्रमबल हिस्सेदारी 60 प्रतिशत और 80 प्रतिशत के बीच रही जबकि 54.3 प्रतिशत जिलों में श्रमिक जनसंख्या अनुपात 40 से 60 प्रतिशत के बीच था।

43.1 प्रतिशत जिलों में बेरोजगारी 0.5 प्रतिशत और तीन प्रतिशत के बीच जिलों की बेरोजगारी दर की बात करें तो यह काफी कम स्तर पर थी। लगभग 43.1 प्रतिशत जिलों में बेरोजगारी 0.5 प्रतिशत और तीन प्रतिशत के बीच रही, जबकि 34.7 प्रतिशत ज़िलों में यह तीन प्रतिशत और 5.5 प्रतिशत के बीच रही।

सिर्फ 14.9 प्रतिशत जिलों में बेरोजगारी दर 5.5 प्रतिशत से ज्यादा दर्ज की गई जबकि 7.2 प्रतिशत जिलों में यह 0.5 प्रतिशत से कम रही। सबसे ज्यादा आबादी वाले 100 जिलों में पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना और बिहार के अररिया में सबसे कम बेरोजगारी दर 0.9 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद अहमदाबाद में 1.1 प्रतिशत रही।

केरल के एर्नाकुलम में सबसे कम एनईईटी दर लगभग 76.2 प्रतिशत जिलों में एनईईटी दर 30 प्रतिशत से कम दर्ज की गई, लेकिन लगभग एक चौथाई यानी 23.7 प्रतिशत में यह दर 30 प्रतिशत से ज्यादा थी।

केरल के एर्नाकुलम में सबसे कम एनईईटी दर 9.6 प्रतिशत दर्ज किया गया, इसके बाद कोयंबटूर में 14.5 प्रतिशत और बेंगलुरु अर्बन में 15 प्रतिशत रही। आंकड़े बताते हैं कि बड़ी आबादी वाले क्षेत्र में भी श्रम बाजार के नतीजे काफी अलग-अलग होते हैं।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)