यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 22, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
रोहित वेमुला के पत्र से सामने आया सच, छात्र संगठन से मोह भंग भी बनी मौत की वजह
रोहित वेमुला की मौत क्या व्यवस्था की नाकामी थी,या उसकी मौत के लिए एएसए जैसे संगठनों की बेरुखी भी थी। ...और पढ़ें

हैदराबाद। दलित छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी पर सियासतदान अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में जुटे हुए हैं। ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब मिलने बाकी हैं।
1.रोहित ने खुदकुशी केंद्रीय विश्वविद्यालय के रवैये से परेशान हो कर की थी, या वो वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था से तंग आ चुका था।
2. क्या उसका मोह एएसए और एसएफआई जैसे छात्र संगठनों से खत्म हो चुका था।
3.क्या वो अपनी मौत के जरिए व्यवस्था में बदलाव के लिए संकेत देने की कोशिश कर रहा था ताकि दलित वर्ग समाज की मुख्य धारा में जुड़ सकें।
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रोहित के लिखे हुए पत्र का विश्लेषण करने पर ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि उसका एएसए और एसएफआई जैसे संगठनों से मोह खत्म हो रहा था। रोहित को ऐसा लगता था कि ये संगठन अपने निहित मकसद को पूरा करने में जुटे हुए हैं। उदाहरण के तौर पर रोहित के पत्र की वो लाइन बहुत ही खास है जिसमें उसने जिक्र किया है कि ऐसा कभी कभी होता है जब किसी शख्स और संगठन के मकसद एक जैसे होते हैं। संगठन और किसी शख्स के बीच की सोच में बहुत अंतर होता है। किसी भी संगठन का अस्तित्व उसके अपने फायदे के लिए होता है। कभी कभी अपने कामों को जरूरत से ज्यादा तवज्जों देते हैं और ऐसा करने में खुद को संतुष्टि भी मिलती है। खैर जो भी हो इन दोनों संगठनों की मदद से वो साहित्य और दुनिया के काफी करीब पहुंचा।
राजनीति शास्त्र के एक विशेषज्ञ के मुताबिक वो उसकी अपनी समझदारी थी कि उसने अपने पत्र में किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। इसके अलावा एएसए और एसएफआई का जिक्र करने के बाद उस लाइन को काट दिया था। वो नहीं चाहता था कि उसकी मौत की व्याख्या को गलत ढंग से दुनिया के सामने पेश किया जाए।
