'रोबोट को काम पर रखो, इंसान को निकालो', पहले बिल गेट्स की चेतावनी, फिर माइक्रोसॉफ्ट ने किया छटनी का एलान
बिल गेट्स ने कंपनियों पर AI से कर्मचारियों को बदलने के दबाव की चेतावनी दी, जिसके ठीक एक दिन बाद ...और पढ़ें

बिल गेट्स की चेतावनी, फिर माइक्रोसॉफ्ट ने किया छटनी का एलान। (रॉयटर्स)
HighLights
बिल गेट्स ने AI से नौकरी जाने की चेतावनी दी।
माइक्रोसॉफ्ट ने 60,000 कर्मचारियों की छंटनी का प्रस्ताव रखा।
गेट्स ने AI पर टोकन टैक्स लगाने का सुझाव दिया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट से सह-संस्थापक बिल गेट्स का कहना है कि कंपनियों पर कर्मचारियों को AI से बदले का दबाव डाला जा रहा है। उनके इस बयान के एक दिन बाद ही माइक्रोसॉफ्ट ने 60,000 कर्मचारियों को कंपनाी में नौकरी से निकालने का प्रस्ताव रखा है।
बिल गेट्स ने रविवार को 'द ऑब्जर्वर' में छपे एक इंटरव्यू में कहा, 'प्रोत्साहन ढांच ही गलत है। यह कुछ ऐसा है कि रोबोट को काम पर रखो, इंसान को निकाल दो और फिर पीछे मुड़कर मत देखो।' दिलचस्प बात यह है कि सोमवार को ही माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और भारत में अपने 60,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की घोषणा कर दी।
गौरतलब है कि गेट्स अब माइक्रोसॉफ्ट में किसी आधिकारिक कार्यकारी या बोर्ड पद पर नहीं हैं।
गेट्स की चेतावनी
बिल गेट्स एआई के दौर को एक विकासवादी घटना मानते हैं, जहां इंसान अब इस ग्रह पर सबसे बुद्धिमान प्राणी नहीं रह जाएंगे। उनका मानना है कि AI लगभग सभी तरह के काम अपने हाथ में ले लेगा, इसकी शुरुआत व्हाइट कॉलर नौकरियों से होगी और फिर ब्लू कॉलर काम में भी शामिल हो जाएंगे।
बिल गेट्स की एक और बड़ी चिंता यह है कि अगर काम करने वाले लोग कम होंगे, तो टैक्स से मिलने वाला पैसा भी कम हो जाएगा। उनके शब्दों में, कुल समृद्धि भले ही बढ़ जाए लेकिन लोगों के लिए मौजूद सुरक्षा कवच छोटा हो जाएगा। वे एआई के इस्तेमाल पर एक टोकन टैक्स लगाने और अरबपतियों पर ज्यादा टैक्स लगाने का सुझाव देते हैं।
गेट्स खुद भी अपनी बात पर अमल करने को तैयार हैं। उनका कहना है कि उन्होंने 14 अरब डॉलर टैक्स दिया है, लेकिन वे 40 अरब डॉलर तक का टैक्स देने के लिए भी तैयार थे।
बड़ी तस्वीर में समझिए
ऐसा नहीं है कि गेट्स यह कह रहे हैं कि एआई पूरी तरह से बुरा है। उन्होंने इसके फायदों की ओर इशारा किया है, जैसे कि दवाओं की खोज में तेजी आना। लेकिन उनका मानना है कि यह तकनीक सरकार की गुणवत्ता की एक असली परीक्षा होगी, खासकर ऐसे समय में जब अमीर देश पहले ही कई मोर्चों पर दबाव झेल रहे हैं और भू-राजनीतिक तनाव काफी अधिक हैं।
उन्होंने कहा कि आप कह सकते हैं कि यह का सबसे सही समय नहीं है कि अरे अमीर देशों, अब तक के अपने सबसे मुश्किल काम को करने के लिए तैयार हो जाओ।
उन्होंने कहा, "आप कह सकते हैं कि यह कहने का सबसे सही समय नहीं है कि - 'अरे अमीर देशों, अब तक के अपने सबसे मुश्किल काम को करने के लिए तैयार हो जाओ'।"
गेट्स की चेतावनी और माइक्रोसॉफ्ट का बायआउट ऑफर भले ही अलग-अलग घटनाएं हों, लेकिन इस बात को नजरअंदाज करना नामुमकिन है कि ये दोनों घटनाएं लगातार दो दिनों में सामने आईं।
जैसे-जैसे कंपनियां एआई में ज्यादा पैसे लगा रही हैं, सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बदलाव की कीमत कौन चुकाएगा? भारत के लिए जहां दुनिया का सबसे बड़ा टेक वर्कफोर्स मौजूद है और दो अब उन देशों की सूची में शामिल है जहां माइक्रोसॉफ्ट अपना ऑफर दे रहा है, यह सवाल आने वाले समय में और भी जोर पकड़ सकता है।
