'उसमें कोई अंदरूनी ताकत थी', बेटे की बहादुरी पर बोले कैप्टन स्मित मच्छर के पिता
पायलट कैप्टन स्मित मच्छर के पिता ने कॉकपिट में हुए जानलेवा हमले के बाद बेटे की बहादुरी और परिवार के मुश्किल पलों को साझा किया।

कैप्टन स्मित मच्छर के पिता ने बताया बेटे की बहादुरी का राज (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जब हीरो पायलट कैप्टन स्मित मच्छर के माता-पिता को जब कॉकपिट में उनके बेटे के साथ हुई घटना और उसकी बहादुरी के बारे पता चला, तब उन्हें सबसे पहले डर महसूस हुआ। लेकिन कुछ ही देर में वे शुरुआती सदमे से उबर गए और सीधे मंदिर पहुंचे और वहां बेटे की सलामती की प्रार्थना की।
कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्र मछार ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल कुछ घंटों को याद करते हुए बताया, हमने प्रार्थना की, हे भगवान, चाहे कुछ भी हो, कोई बुरी खबर न आए; कृपया उसे बचा लें।
कठिन समय में परिवार ने खुद को संभाला
एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में कैप्टन स्मित मच्छर के पिता भूपेंद्र मछार ने बताया कि किस तरह से उस कठिन समय में परिवार ने खुद को संभाला। उन्होंने बताया, किसी भी माता-पिता की तरह सबसे पहले मन में खौफ और सदमा ही आया था। हमने तुरंत भगवान के सामने दीया जलाया और प्रार्थना की।
बेटे के साहस को बताया ईश्वर की कृपा
पिता भूपेंद्र मछार अपने बेटे के इस अदम्य साहस का श्रेय ईश्वर की कृपा को देते हैं। उन्होंने कहा, इस तरह की स्थिति के लिए किसी को खास ट्रेनिंग नहीं दी जाती। यह भगवान की कृपा और अंदरूनी ताकत थी कि जब संकट आया, तो स्मित ने अपनी पूरी ताकत लगाकर मुकाबला किया। उनके मन में बस एक ही बात थी कि पीछे बैठे किसी भी यात्री की जान नहीं जानी चाहिए।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि हालांकि पूरी दुनिया के लिए यह गर्व का पल है, लेकिन एक साधारण परिवार होने के नाते उनके, उनकी पत्नी और स्मित की पत्नी के लिए इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता स्मित की सेहत है। पूरी तरह ठीक होने के बाद स्मित एक बार फिर अपनी फ्लाइंग ड्यूटी शुरू करेंगे, क्योंकि पिछले 17 सालों से उड़ान ही उनका जुनून और सब कुछ रही है।
भूपेंद्र मछार ने बताया कि उनका बेटा अपने पेशे को लेकर बेहद जुनूनी है और वह लगातार दूसरे पायलटों की मदद करता रहता है। उन्होंने मजाक में कहा, फ्लाइंग (उड़ान) उसकी पत्नी की तरह है।
सिर और हाथों में गंभीर चोटें
फिलहाल, पायलट कैप्टन स्मित का इलाज अबू धाबी के एक अस्पताल में चल रहा है और वे धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। उनके पिता ने बताया कि डॉक्टरों के अनुसार उनके सिर और दोनों हाथों में गंभीर चोटें आई हैं, सिर का ऑपरेशन हुआ है और कई टांके लगे हैं। इन घावों को पूरी तरह भरने में समय लगेगा।
को-पायलट ने किया था जानलेवा हमला
गौरतलब है कि कॉकपिट के भीतर अपने ही को-पायलट द्वारा कुल्हाड़ी से किए गए जानलेवा हमले को नाकाम करते हुए कैप्टन स्मित ने 174 फ्लाईदुबाई यात्रियों को मौत के मुंह से बचा लिया। ओमान के नागरिक को-पायलट द्वारा किए गए इस हमले के दौरान विमान नीचे की ओर गिरने लगा था।
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, कैप्टन स्मित ने सूझबूझ दिखाते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोला। इसके बाद यात्रियों ने हमलावर को काबू में किया और फ्लाइट में मौजूद ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने प्लेन की सुरक्षित लैंडिंग कराई।
