यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 19, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
ईडब्ल्यूएस के लिए बनाए जाएंगे 80 हजार से ज्यादा घर
अंतरमंत्रालयी केंद्रीय आवंटन एवं निगरानी समिति ने ईडब्ल्यूएस के लिए 80 हजार से ज्यादा घर बनाए जाने को मंजूरी दे ...और पढ़ें

नई दिल्ली। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 80 हजार से ज्यादा घर बनाए जाएंगे। इसके लिए अंतरमंत्रालयी केंद्रीय आवंटन एवं निगरानी समिति ने गुरुवार को मंजूरी दी। ये घर सात राज्यों के 163 शहरों में बनाए जाएंगे। इन पर करीब चार हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। शहरी विकास मंत्रालय के मुताबिक इन मकानों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत 1,226 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। हर घर के लिए डेढ़ लाख रुपये के हिसाब से यह सहायता दी जाएगी। इन घरों पर 4,076 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आएगा।
पीएमएवाई के तहत देश भर में शहरी गरीबों के लिए दो करोड़ घर बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। मंत्रालय की सचिव नंदिता चटर्जी की अध्यक्षता में समिति की बुधवार को बैठक हुई। इसमें शहरी गरीबों के लिए सात राज्यों से ही ऐसे मकान बनाने के आवेदन मिले थे। इन पर विचार के बाद समिति ने मकानों के लिए सहायता देने का फैसला लिया है। इसमें सबसे ज्यादा 27,830 घर पश्चिम बंगाल में बनाए जाएंगे। सरकार शहरी गरीबों के लिए अब तक देश के 13 राज्यों में पांच लाख से ज्यादा मकान बनाने की मंजूरी दे चुकी है।
कुल 80,000 मकानों में से 58 हजार 'बेनिफिशियरी लेड कंस्ट्रक्शन कंपोनेंट के तहत बनेंगे। इसमें लाभार्थी को अपनी जमीन पर मकान बनाना होता है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से वित्तीय मदद प्रदान की जाती है। इसके अलावा 23 हजार घर 'अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिपÓ कंपोनेंट के तहत बनाए जाने हैं। इसमें राज्य जमीन उपलब्ध कराते हैं, जबकि केंद्र प्रति लाभार्थी 1.5 लाख रुपये की सहायता प्रदान करता है।
किस सूबे को कितने मकान
राज्य , घरों की संख्या
पश्चिम बंगाल 27,830
तेलंगाना 8,922
बिहार 13,315
मिजोरम 8,922
राजस्थान 6,052
झारखंड 2,337
उत्तराखंड 484
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