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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 27, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कब्रिस्तान में रह रहे एड्स पीड़ित के बच्चे

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Published: Sat, 27 Jul 2013 05:50 AM (GMT+05:30)Updated: Sat, 27 Jul 2013 05:51 AM (GMT+05:30)

मांधाता के जमुआ गांव में एक दंपति की एड्स से मौत के बाद परिजनों ने उनके पांच बच्चों को इस ...और पढ़ें

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प्रतापगढ़ [जागरण संवाददाता]। मांधाता के जमुआ गांव में एक दंपति की एड्स से मौत के बाद परिजनों ने उनके पांच बच्चों को इस डर से घर से निकाल दिया कि कहीं उनको भी एड्स न हो जाए। कहीं आसरा न मिलने पर अनाथ बच्चों ने गांव के कब्रिस्तान में डेरा डाल दिया। महीनों बच्चे इसी हालात में दिन काटते रहे। बात जब मीडिया में उछली तो शुक्रवार को शासन ने बच्चों की सुधि ली और उनके लिए आवास और वित्तीय मदद का ऐलान किया।

गांव के वहाजुद्दीन की तीन साल पहले एड्स की वजह से मौत हो गई। जून में उसकी पत्‍‌नी आशिया भी चल बसी। इसके बाद वहाजुद्दीन के बच्चों इरफान, आदिल, एखलाक, नीशा बानो व मोनिस को परिजनों ने इस आशंका में बाहर निकाल दिया कि कहीं उन्हें भी एड्स न हो। माता-पिता को खो चुके इन बच्चों का गांव में जीना मुश्किल हो गया। वे पूरे दिन गांव के कब्रिस्तान के पास पॉलिथिन डालकर रहने लगे। हालांकि रात में वे छिपकर अपने पुस्तैनी घर में समय काटते। उनका भरण पोषण भी मुश्किल हो गया था। बच्चों की गांव वालों ने भी किसी तरह की कोई मदद नहीं की।

कहीं से जानकारी मिलने पर एलायंस क्लब के अध्यक्ष रोशन लाल गांव पहुंचे और बच्चों को दैनिक उपयोग की वस्तुएं प्रदान की। उन्होंने जिलाधिकारी से मिलकर बच्चों को आर्थिक तथा अन्य सहायता देने का अनुरोध किया। तब डीएम विद्याभूषण ने चार दिन पहले एसडीएम सदर संजय कुमार को यह मामला देखने को कहा। जिससे मामला मीडिया में आ गया। इसके बाद प्रशासन तेजी से हरकत में आया। शुक्त्रवार को कई अधिकारी गांव पहुंचे। डीएम के निर्देश पर बच्चों को आवास के लिए डेढ़ बिस्वा भूमि का पट्टा दिया गया। लोहिया आवास की संस्तुति की गई। इसके अलावा बड़े लड़के रिजवान के नाम अंत्योदय कार्ड बनाया गया। पीएनपी प्लस संस्था जो एचआइवी पीड़ितों के लिए काम करती है, ने भी गांव पहुंचकर इन बच्चों से मुलाकात की। बच्चों का एचआइवी परीक्षण कराया गया। जांच में किसी को भी एचआइवी की पुष्टि नहीं हुई। मुख्यमंत्री कार्यालय से भी शुक्त्रवार को पांचों बच्चों को एक-एक लाख रुपये और दो बच्चों का दाखिला कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कराये जाने की घोषणा की गई।

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