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भारत ने खारिज किया 'ऑलीगार्क' का दावा तो भड़के एलन मस्क, स्टारलिंक पर क्यों छिड़ा विवाद?

Published: Thu, 08 Oct 2026 10:58 PM (IST)

एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के जरिए उन क्षेत्रों की मदद करने की बात कही है, ...और पढ़ें

एलन मस्क के स्टारलिंक पर भारत में विवाद (फाइल फोटो)

एलन मस्क के स्टारलिंक पर भारत में विवाद (फाइल फोटो)

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। स्पेसएक्स के सीईओ और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने गुरुवार को स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के जरिए भारत के उन क्षेत्रों की मदद करने की बात कही, जहां अभी तक इंटरनेट नहीं मिल पा रही है।

इससे एक दिन पहले मस्क ने आरोप लगाया था कि उनकी कंपनी को भारत में अमीर वर्ग के कारण नियामक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसे भारतीय सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया था।

इसके बाद मस्क ने करीब 10 मिनट के अंदर तीन ट्वीट कर स्टारलिंक को सबसे कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों के लिए फायदेमंद बताया और विरोध करने वालों पर सबसे गरीब लोगों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।

बता दें कि मस्क की यह टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब स्टारलिंक का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस में भाग ले रहा है।

टेस्ला के बड़े वादे अधूरे रहे और स्टारलिंक पर मंशा साफ नहीं

भारत के लिए एलन मस्क अभी तक सिर्फ योजनाएं ही बनाते रहे हैं। टेस्ला को लेकर उन्होंने बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन स्थानीय उत्पादन में निवेश से पीछे हट गए। स्टारलिंक को लेकर भी उनकी मंशा साफ नहीं दिखती। मस्क बार-बार भारत में निवेश और सेवा शुरू करने की बात करते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में टेस्ला का कारखाना नहीं बना और स्टारलिंक अभी सुरक्षा मंजूरी के चरण में ही अटका है।

20 जून 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयार्क में दोनों की मुलाकात भी हुई। बैठक के बाद मस्क ने पत्रकारों से कहा कि मोदी भारत में महत्वपूर्ण निवेश के लिए दबाव डाल रहे हैं और टेस्ला जितनी जल्दी संभव हो भारत में आएगी।

इसके बाद अप्रैल 2024 में मस्क ने खुद एक्स पर मोदी से मुलाकात और भारत यात्रा का एलान किया। सभी को यह उम्मीद थी कि उनका दौरा टेस्ला फैक्ट्री योजना से जुड़ा था, लेकिन कुछ दिन पहले उन्होंने टेस्ला की भारी जिम्मेदारियों का हवाला देकर यात्रा रद कर दी। हालांकि, इसके बाद उन्होंने चीन का दौरा किया और वहां प्रीमियर ली छ्यांग से मुलाकात कर फुल सेल्फ-ड्राइविंग संबंधी बातचीत आगे बढ़ाई।

चीन में टेस्ला का निवेश बहुत पहले हो चुका है। शंघाई गिगाफैक्ट्री का निर्माण जनवरी 2019 में शुरू हुआ और उसी साल के अंत तक उत्पादन चालू हो गया। यह चीन की पहली पूरी तरह विदेशी स्वामित्व वाली कार फैक्ट्री बनी।

आज वहां 400 से ज्यादा टियर-1 स्थानीय आपूर्तिकर्ता हैं और कंपोनेंट्स का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्थानीय स्तर पर बनता है। टेस्ला के आने से चीन के ईवी उद्योग को जबरदस्त पुश दिया, वहां इलेक्ट्रिक वाहनों की पूरी स्पलाई श्रृंखला स्थापित हो गई। कई छोटी पार्ट्स कंपनियां वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनकर उभरीं।

आज चीन की प्रमुख ईवी कंपनियां टेस्ला से आगे निकल चुकी हैं। भारत में इसके उलट कारखाना योजना अटकी रही। कभी उच्च आयात शुल्क को कारण बताया गया तो कभी भारतीय बाजार में मांग के सीमित होने का हवाला दिया गया तो कभी कहा गया कि भारत में निवेश शर्ते बहुत कठोर हैं। 2025-26 में टेस्ला ने शोरूम तो खोला लेकिन स्थानीय स्तर पर फैक्ट्री स्थापित करने की बात ठंडे बस्ते में डाल दी गई।

स्टारलिंक की भारत योजना भी इसी पैटर्न पर दिखती है। कंपनी को जून 2025 में जीएमपीसीएस लाइसेंस और जुलाई 2025 में इन-स्पेस की मंजूरी मिली लेकिन व्यावसायिक सेवा अभी शुरू नहीं हुई। सरकार की मुख्य चिंता सैटेलाइट नेटवर्क की सुरक्षा, डेटा पर नियंत्रण, वैध इंटरसेप्शन और आपात स्थिति में सेवा पर भारतीय नियंत्रण को लेकर है। स्टारलिंक के इंटर-सैटेलाइट लेजर लिंक ऐसे हैं कि ट्रैफिक भारतीय गेटवे को बायपास कर सकता है।

मणिपुर में इंटरनेट शटडाउन के दौरान स्टारलिंक उपकरण जब्त होने और ईरान संघर्ष में अनधिकृत टर्मिनलों के इस्तेमाल की रिपोर्टों ने ये आशंकाएं बढ़ाई हैं। सुरक्षा मूल्यांकन तीनों लाइसेंसधारियों के लिए चल रहा है। चीन में मस्क ने तेजी से निवेश और उत्पादन किया, जबकि भारत में वादे और आरोप ज्यादा, ठोस निवेश और सुरक्षा समाधान कम दिखे हैं। (समाचार एजेंसी के इनपुट के साथ)