यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 18, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
वापसी के बाद RBI के सामने नोटों को नष्ट करने की होगी बड़ी चुनौती
वैसे तो रिजर्व बैंक के लिए पुराने नोटों को नष्ट करने का काम कोई नया नहीं है लेकिन इतनी बड़ी संख्या में उसने कभी नोटों को नष्ट नहीं किया है।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पांच सौ और हजार के नोटों को आम जनता से वापस लेने के बाद उसे नष्ट करने में भी रिजर्व बैंक को मशक्कत करनी होगी। वैसे तो रिजर्व बैंक के लिए पुराने नोटों को नष्ट करने का काम कोई नया नहीं है लेकिन इतनी बड़ी संख्या में उसने कभी नोटों को नष्ट नहीं किया है। बैंकों के अधिकारी मान रहे हैं कि सुर्कलेशन के अगले वर्ष की शुरुआत में जब प्रचलन से बाहर किये गये 500 व 1000 के नोटों को नष्ट करने का काम शुरु होगा तो यह दुनिया में इस तरह का सबसे बड़ा काम होगा।
भारतीय रिजर्व बैंक के पास 27 श्रेडिंग व ब्रिकटिंग सिस्टम मशीन (एसबीएस) हैं जो आरबीआइ के कई केंद्रों में स्थापित हैं। यहां पुराने व बाजार से लौटाये गये नोटों के पहले छोटे टुकड़े किये जाते हैं और फिर राख में तब्दील कर ईंट बना दिया जाता है। सामान्य तौर पर हर वर्ष 13.5-14 अरब नोटों को नष्ट किया जाता है लेकिन इस बार इनसे दोगुणा नोट नष्ट करने पड़ेंगे। रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि अभी बाजार में पुराने 500 व 1000 के 14179.43 अरब रुपये मूल्य के 21 अरब नोट हैं। रिजर्व बैंक को इन सभी नोटों को नष्ट करने की तैयारी करनी है। इसका साफ मतलब होगा कि मौजूदा क्षमता से काफी ज्यादा नोटों को नष्ट करना होगा। बताते चलें कि रिजर्व बैंक के मुख्य कार्यो में नोटों को नष्ट करना भी एक अहम काम है।
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दरअसल, सिस्टम में वापस लौटे एक एक नोट का रिकार्ड रखा जाता है। वापस लौटे नोटों को नष्ट करने से पहले उनका मिलान जारी नोटों से किया जाता है ताकि यह पता लग सके कि बाजार में अभी भी कितने नोट हैं। यह रिकार्ड इसलिए भी रखना जरुरी है ताकि इस सीरिज के नकली नोट बाजार में न पहुंचा दिया जाए। उसके बाद ही उन्हें नष्ट किया जाता है। वापस किये गये नोट को बैंक व डाक घरों की शाखाओं से उठा कर उन्हें सुरक्षित नष्ट होने वाले केंद्रों तक पहुंचाने की चुनौती होती है। नोटों को नष्ट करने की पूरी प्रक्रिया आरबीआइ की सख्त निगरानी में होती है। नोटों को ईंट में तब्दील करने के बाद इन्हें आरबीआइ अपने विभिन्न कार्यालयों के जरिए नीलाम कर देता है। इसके लिए बकायदा टेंडर जारी किये जाते हैं।
सूत्रों के मुताबिक इस बार काम कितना बड़ा होगा यह आप इस तथ्य से समझ सकते हैं कि जहां वर्ष 2012-13 में 1000 के 4.5 करोड़ नोट नष्ट किये गये लेकिन इस बार 1000 के 6.32 अरब नोटों को नष्ट करने की तैयारी करनी होगी। इसी तरह से उस वर्ष 500 रुपये के 22.63 करोड़ नोट नष्ट किये गये थे जबकि इस बार हो सकता है कि 7.85 अरब नोटों को नष्ट करना पड़े। इस तरह से भारत में इस वर्ष तकरीबन 25 अरब नोट नष्ट किये जाएंगे। चीन और अमेरिका को छोड़ कर इतने नोट किसी भी बड़े देश में प्रचलन में नहीं है। चीन में 50 अरब नोट प्रचलन में है जबकि अमेरिका में प्रचलन में रहे नोटों की संख्या 35 अरब के करीब है। रिजर्व बैंक का डाटा बताता है कि ब्रिटेन में तो महज तीन अरब और यूरोपीय संघ में 16 अरब नोट हैं।
