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देश में बढ़ेगी कंटेनर निर्माण क्षमता, मोदी कैबिनेट ने स्वीकृत की नई योजना

Published: Wed, 28 Oct 2026 11:31 PM (IST)

सरकार ने देश में जल परिवहन विस्तार और लाजिस्टिक्स लागत कम करने के लिए कंटेनर निर्माण संवर्धन योजना (सीएमपीएस) को मंजूरी दी है।

10,000 करोड़ की कंटेनर निर्माण संवर्धन योजना स्वीकृत

10,000 करोड़ की कंटेनर निर्माण संवर्धन योजना स्वीकृत

HighLights

  1. 10,000 करोड़ की कंटेनर निर्माण संवर्धन योजना स्वीकृत

  2. घरेलू कंटेनर उत्पादन क्षमता दस गुना बढ़ेगी

  3. 3,000 प्रत्यक्ष, 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश में लाजिस्टिक्स की दर को कम करने के लिए सरकार जल परिवहन को विस्तार देने के लिए लगातार प्रयासरत है। शिप निर्माण और मरम्मत के लिए महत्वपूर्ण कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं और अब कंटेनर निर्माण को भी प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्रीय कैबिनेट ने कंटेनर निर्माण संवर्धन योजना (सीएमपीएस) को स्वीकृति दी है। दस हजार करोड़ रुपये के बजट से यह योजना वित्त वर्ष 2039-40 तक के लिए मंजूर हुई है।

इसके पीछे उद्दश्य भारत में विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धी कंटेनर निर्माण ईकोसिस्टम तैयार करना, आयात पर निर्भरता कम करना और आपूर्ति शृंखला को और भी अधिक मजबूत बनाना है। इसके लिए नई निर्माण इकाइयों को समर्थन और मौजूदा कंटेनर निर्माण इकाइयों काे विस्तार दिया जाएगा।

10000 करोड़ की कंटेनर निर्माण संवर्धन योजना स्वीकृत

कंटेनर निर्माण योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। 859 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली 'इंट्रेस्ट सबवेंशन असिस्टेंस' (आइएसए) योजना के तहत कंटेनर निर्माताओं को तीन प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी।

यह सब्सिडी उन पात्र टर्म लोन (पूंजीगत ऋण) पर मिलेगी, जिनका उपयोग ग्रीनफील्ड कंटेनर निर्माण इकाइयां स्थापित करने या मौजूदा कंटेनर निर्माण क्षमताओं के विस्तार (ब्राउनफील्ड विस्तार) के लिए किया गया हो। 8,891 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ 'आपरेशनल एक्सपेंडिचर असिस्टेंस' (ओईए) शुरू की गई है।

इसका उद्देश्य वैश्विक शिपिंग मानकों के अनुसार निर्मित और पात्र निर्माताओं द्वारा बेचे जाने वाले सभी कंटेनरों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इससे लागत के अंतर को कम करने और घरेलू स्तर पर निर्मित कंटेनरों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

3000 प्रत्यक्ष, 50000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार

योजना के तहत 'डायनामिक लोंगिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग' जैसी साझा सुविधाओं की स्थापना में सहायता के लिए 150 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन (प्रमाणीकरण) संबंधी सहयोग दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से वार्षिक घरेलू कंटेनर निर्माण क्षमता में 7.5 लाख टीईयू तक लगभग दस गुणा की वृद्धि होगी। गुणवत्तापूर्ण शिपिंग कंटेनरों के लिए भारत को वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने की क्षमता के साथ एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग आधार तैयार होगा।

भारत की समुद्री और रसद आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है, जबकि कार्नर कास्टिंग, विशेष स्टील, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे सहायक उद्योगों को समर्थन मिलेगा।