नैरेटिव वार में सिर्फ राजनीतिक नहीं दूसरे क्षेत्र की मु्खरता भी जरूरी, चुनाव आयोग विवाद पर घर-घर बुकलेट पहुंचाएगी भाजपा
भाजपा 'नैरेटिव वार' में जूझ रही है, जहां विपक्ष को चुनाव आयोग जैसे मुद्दों पर जनता का समर्थन नहीं मिल ...और पढ़ें

चुनाव आयोग विवाद पर घर-घर बुकलेट पहुंचाएगी भाजपा।
HighLights
भाजपा 'नैरेटिव वार' में जनता का समर्थन जुटाने में विफल।
गैर-राजनीतिक क्षेत्रों से मुखर चेहरों की कमी महसूस हुई।
चुनाव आयोग विवाद पर भाजपा घर-घर बुकलेट बांटेगी।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सीजेपी में फिलहाल चुप्पी है। कांग्रेस और विपक्षी दलों पर व्यापारियों की ओर से एक नवंबर को प्रस्तावित रैली को दीपावली के कुछ दिनों बाद तक टालने का दबाव है।
छात्र मुद्दे से परे चुनाव आयोग के मामले में प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक दलों को आम जनता का समर्थन नहीं मिला है। यह सबकुछ सरकार और सत्ताधारी भाजपा के लिए राहत की बात है। लेकिन यह भी महसूस हो रहा है कि सड़क पर भले ही आम जनता न दिखे, कुछ मुद्दों पर उनके मन में सवाल बैठे हैं।
खासतौर से तब जबकि आरोपों के जवाब में सत्तापक्ष के प्रवक्ताओं की ओर से इतिहास के पन्ने पलट दिए जाते हैं और बताया जाता है कि विपक्षी दलों की सरकारों में क्या होता था। यानी वर्तमान मुद्दों पर आंकड़ों और दस्तावेजों के साथ स्पष्टीकरण की बजाय आरोप ही लगाए जाते हैं। विरोधी स्वर जहां राजनीति के अलावा दूसरे क्षेत्रों से भी उभर रहे हैं, वहीं भाजपा व सरकार फिल्म, साहित्य, उद्योग के क्षेत्र से लोकप्रिय व मुखर चेहरों को उतारने में असफल रही है।
जुलाई माह में नीट के बाद हुए आंदोलन के समय ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टा के जरिए युवाओं से संवाद बना लिया था। लेकिन बाकी सरकार और पार्टी सार्थक तरीके से संवाद स्थापित करने में जूझ रही है। पार्टी के ही सूत्रों का मानना है कि आज के चुनौतीपूर्ण समय में अरुण जेटली जैसे प्रबंधक नेता की कमी ज्यादा महसूस हो रही है जो राजनीति से परे भी हर क्षेत्र में दखल देते थे।
वस्तुत: यह रोजाना दिखता है जिस मुद्दे का जवाब कानूनी पहलू पर दिया जाना चाहिए उसका जवाब भी राजनीतिक होता है। नसीरुद्दीन शाह का सरकार विरोधी एजेंडा बहुत पुराना है लेकिन यह भी प्रासंगिक है कि उनका जवाब भी उन्हीं के रुतबे जैसे मनोरंजन के क्षेत्र के लोगों की ओर से आए। बेशक फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसी जमात है जो सरकार के फैसलों पर विश्वास करती है, फिल्में भी बनाती है और कमाती भी है लेकिन आज वह सभी चुप हैं।
दरअसल नैरेटिव की लड़ाई में हर क्षेत्र की भूमिका होती है। बल्कि राजनीति के मुकाबले ऐसे क्षेत्र ज्यादा सफल होते हैं जिनमें लोगों की रुचि ज्यादा है।
चुनाव आयोग विवाद पर घर-घर बुकलेट पहुंचाएगी भाजपा
भाजपा ने तय किया है कि बुकलेट छपाकर अब घर घर पहुंचेगी और चुनाव आयोग के विवादित मुद्दे पर जानकारी देगी। यह अच्छा प्रयास होगा लेकिन चुनाव आयोग को भी सक्रिय होना होगा।
आखिरकार वह स्वायत्त संवैधानिक संस्था है और उसकी गरिमा तार तार हो रही है तो उसे कदम उठाना ही होगा। उसकी लड़ाई कोई दूसरा कब तक लड़ेगा। चुनाव आयोग भी लोकप्रिय बड़े चेहरों को अपना आइकॉन बनाता रहा है। क्या वे आइकॉन इस लड़ाई में नहीं कूद सकते। इस तरह के सारे सुझाव भाजपा के अंदर से ही आ रहे हैं लेकिन सरकार से लेकर चुनाव आयोग तक इस पर बहुत सक्रिय नहीं दिखी है।
आयोग भी प्रेस विज्ञप्ति जारी करने की बजाय सामने आकर सवाल जवाब के लिए तैयार होना चाहिए। मामला कोर्ट में होने के बावजूद अगर विपक्षी दल आरोप लगाते हैं तो चुनाव आयोग को भी जवाब देने का अधिकार है। किसी जिम्मेदार अधिकारी को सामने आकर यह भरोसा पैदा करना होगा।
