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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बच्चों को तस्करों से भी बचाएगा आधार कार्ड

By Sachin BajpaiEdited By:
Published: Sun, 05 Mar 2017 08:14 PM (IST)Updated: Sun, 05 Mar 2017 08:23 PM (IST)

भारत में बच्चों की तस्करी एक बड़ी समस्या बन गई है। तस्करों के चंगुल में फंसे बच्चों की पहचान कर ...और पढ़ें

बच्चों को तस्करों से भी बचाएगा आधार कार्ड
बच्चों को तस्करों से भी बचाएगा आधार कार्ड

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मिड डे मिल के लिए बच्चों के आधार कार्ड की अनिवार्यता उनकी सुरक्षा में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है। आधार कार्ड बनने के बाद तस्करों के लिए बच्चों की पहचान को छुपाए रखना आसान नहीं होगा। इसके साथ ही छोटे बच्चों के असली मां-बाप का पता आसानी से लग सकता है।

भारत में बच्चों की तस्करी एक बड़ी समस्या बन गई है। तस्करों के चंगुल में फंसे बच्चों की पहचान कर उन्हें असली मां-बाप के पहुंचना एजेंसियों के लिए बड़ी टेढ़ी खीर साबित होता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर आठ मिनट में एक बच्चा तस्करों के चंगुल में फंस जाता है। तस्कर बच्चों का इस्तेमाल सेक्स वर्कर से लेकर भीख मांगने तक में करते हैं। बहुत सारे मामलों में तस्कर बच्चों को अपना बताकर एजेंसियों को गुमराह करने में सफल हो जाते हैं। खासकर पांच-छह साल से कम उम्र के बच्चे, जो अपने मां-बाप या घर का पता भी नहीं जानते हैं, को तस्करों के चंगुल से छुड़ाकर उनके मां-बाप तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।

आधार कार्ड इस समस्या का रामबाण इलाज साबित हो सकता है। एक बार आधार कार्ड बन जाने के बाद सभी बच्चों का फिंगरप्रिंट और आंख की पुतली का फोटो जैसे नहीं बदले जाने वाले पहचान सुरक्षित रख लिए जाते हैं। किसी भी बच्चे का फिंगरप्रिंट या आंख पुतली का फोटो मिलाते ही उसका घर-परिवार, माता-पिता की पूरी जानकारी एक क्लिक पर जांच एजेंसी के सामने होगी। ऐसे में तस्करों के लिए बच्चे की पहचान छुपाना असंभव हो जाएगा।

यही वजह है कि अब 88 फीसदी जनसंख्या के आधार के दायरे में आ जाने के बाद सरकार का पूरा जोर अब 18 साल से कम उम्र के बच्चों के आधार कार्ड मुहैया कराने पर है। इस काम को अंजाम देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने देश उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भी लिखा है जहां अभी यह दर कम है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 5 से 18 साल आयु वर्ग के 70 फीसदी बच्चों का आधार कार्ड बन गया है।

मिड डे मिल में इसे अनिवार्य करने के बाद जून तक लगभग शतप्रतिशत बच्चों का आधार कार्ड बन जाएगा। इसके साथ ही सरकार पांच साल के कम उम्र के बच्चों का आधार बनवाने पर भी जोर दे रही है। इस आयुवर्ग के बच्चों में लगभग 30 फीसदी का आधार कार्ड अभी तक बन चुका है। सरकार की कोशिश पांच साल से कम उम्र के शतप्रतिशत बच्चों का आधार कार्ड बनवाने की है। ऐसे होने के बाद बच्चों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने में सफलता मिल सकती है।