यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 24, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पोंजी स्कीमों ने लोगों की जेब कर दी खाली, लगा दिया 40 हजार करोड़ का चूना
अवैध तरीके से पैसा जुटाने वाली पोंजी स्कीमों ने इस साल निवेशकों को खूब रुलाया। कॉरपोरेट गवर्नेस की कमियों और ...और पढ़ें

नई दिल्ली। अवैध तरीके से पैसा जुटाने वाली पोंजी स्कीमों ने इस साल निवेशकों को खूब रुलाया। कॉरपोरेट गवर्नेस की कमियों और नियामकीय चूकों का फायदा उठाकर कंपनियों ने फर्जीवाड़े के जरिये आम निवेशकों को निशाना बनाया। इसके कारण लोगों को करीब 40 हजार करोड़ रुपये का चूना लगा।
साल की पहली छमाही में पश्चिम बंगाल के सारधा घोटाले के पीड़ित अपने लिए न्याय की गुहार लगाते दिखे। इसके अलावा आलू बांड, बकरी पालन, घी में निवेश जैसी फर्जी योजनाओं के जरिये घोटालेबाजों ने खूब चांदी काटी।
जिग्नेश शाह के नेतृत्व वाले नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) में हुए 5,600 करोड़ रुपये के भुगतान घोटाले ने तो निवेशकों का मनोबल ही तोड़ दिया है। यह घोटाला एक्सचेंज की गड़बड़ियों और नियामकीय कमियों का नतीजा था। इतने सारे मामलों का भंडाफोड़ होने के बावजूद सरकार अभी तक इन पर लगाम लगाने के सटीक उपाय करने में नाकाम रही है।
भगवान के नाम पर भी पोंजी स्कीम
पश्चिम बंगाल स्थित सारधा चिटफंड के घोटाले का पता इस साल अप्रैल में चला। इसमें निवेशकों का करीब 30 हजार करोड़ रुपये फंसा हुआ है। मामला सामने आने के बाद केंद्र और बंगाल सरकार जागी। करीब आठ महीने बीतने के बावजूद निवेशकों को अभी तक पूरी राशि मिलने की उम्मीद नहीं है। राज्य सरकार ने कुछ निवेशकों को रकम लौटाने की व्यवस्था की है मगर यह भी कागजी खानापूरी ही लगती दिख रही है।
रियल एस्टेट में निवेश करवा 200 करोड़ ठगे
इसी तरह एनएसईएल घोटाले में भी निवेशकों को डूबी राशि में से बहुत कम रकम मिल पाई है। आलू बांड, घी में निवेश और बकरी पालन के नाम पर धन जुटाने वाली कंपनियों पर बाजार नियामक सेबी ने पाबंदी तो लगा दी मगर इन कंपनियों का अता-पता ही नहीं चल पा रहा है। ऐसे में निवेशकों के बकाये की वापसी की सूरत ही नहीं बनती। इन्होंने इंटरनेट के जरिये यह फर्जीवाड़ा किया था।
अवैध स्कीमों के जरिये धन जुटाने वाली 76 कंपनियों के खिलाफ सरकार ने गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआइओ) को जांच करने का आदेश दिया है। सेबी, रिजर्व बैंक सहित कंपनी मामलों के मंत्रालय का इरादा भले ही पोंजी स्कीमों का अस्तित्व खत्म करने की हो मगर इन मामलों की बढ़ती संख्या इसी ओर इशारा करती हैं कि अभी भी निवेशकों के हित सुरक्षित नहीं हैं।
