यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 02, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हर परिवार में खुलेंगे बैंक खाते,15 अगस्त से शुरू होगी मोदी सरकार की योजना
संपूर्ण वित्तीय समावेशन यानी हर भारतीय परिवार में एक या दो बैंक खाता खोलने की स्कीम मोदी सरकार की पहली ...और पढ़ें

नई दिल्ली (जयप्रकाश रंजन)। संपूर्ण वित्तीय समावेशन यानी हर भारतीय परिवार में एक या दो बैंक खाता खोलने की स्कीम मोदी सरकार की पहली आम जनता से सीधे तौर पर जुड़ी योजना है। यही वजह है कि केंद्र सरकार का एक बड़ा अमला इस योजना को पूरी तरह से 'फूलप्रुफ' बनाने में जुटा हुआ है। 15 अगस्त से लागू होने वाली इस योजना के अगले तीन साल का पूरा रोडमैप अभी ही तैयार कर लिया गया है। निगरानी के लिए वित्त मंत्री से लेकर जिला कलेक्टर के बीच तीन स्तरीय ढांचा तैयार किया जा रहा है ताकि इसमें न कोई गड़बड़ी हो और न ही इसके असफल होने की गुंजाइश बचे।
सूत्रों के मुताबिक, संपूर्ण वित्तीय समावेशन योजना में मोदी की छाप पूरी तरह से दिखेगी। पूरी योजना का मोटे तौर पर खाका प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने तैयार किया है। इसे आगे बढ़ाने का काम वित्त मंत्रालय कर रहा है। मंत्रालय के तहत आने वाले बैंकों व वित्तीय संस्थानों की भूमिका तय कर दी गई है। नाबार्ड को मिशन मोड के तहत चलाई जाने वाली योजना के प्रचार के साथ फंड की व्यवस्था करने को कहा गया है। योजना के हर चरण के लिए अवधि निर्धारित कर दी गई है। मसलन, सभी बैंकों को 15 जुलाई, 2014 को ही सूचित कर दिया गया कि उन्हें किन जिलों व गांवों में योजना को लागू करना है। बैंकों को संबंधित मशीन भी पहुंचा दी गई है। बैंकों को सात अगस्त, 2014 तक कुर्सी, मेज, कार्यालय व बैंकिंग प्रतिनिधि के चयन का काम पूरा करने को कहा गया है। 10 से 14 अगस्त के बीच इन प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने का काम होगा। 15 अगस्त, 2014 को देश भर में खाता खोलने का काम शुरू हो जाएगा।
मोदी की वजह से ही पूरी योजना की निगरानी की पुख्ता व्यवस्था की जा रही है। सिर्फ केंद्र सरकार तीन स्तरों पर इसकी निगरानी करेगी। शीर्ष स्तर पर पूरी योजना की निगरानी वित्त मंत्री की अध्यक्षता में गठित एक समिति करेगी। इसमें संचार मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, रिजर्व बैंक गवर्नर और वित्त, संचार और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के सचिव व भारतीय बैंक संघ के अध्यक्ष शामिल होंगे। वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक दूसरी समिति होगी। इसमें आरबीआइ डिप्टी गवर्नर, सभी बैंको के चेयरमैन, बीएसएनएल के सीएमडी, नाबार्ड के चेयरमैन सहित कई अन्य अफसर होंगे। वित्त सचिव (वित्तीय संस्थान) की अध्यक्षता में एक तीसरी समिति भी होगी, जो हर हफ्ते इसकी समीक्षा करेगी। इसके अलावा राज्य सकार पर एक अन्य समिति होगी। इसके अध्यक्ष हर राज्य में योजना संबंधित निदेशक होंगे। इसमें राज्य के प्रमुख सचिव और आरबीआइ, नाबार्ड, बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अफसर सदस्य होंगे। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक जिलास्तरीय समिति भी होगी। यह समिति महीने में दो बार इसकी समीक्षा करेगी।
