यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 22, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बुखार से किशोरी की मौत, डायरिया रोगियों से बेडों का संकट

उन्नाव, जागरण संवाददाता: मौसम की गरमाहट के साथ ही संक्रामक बीमारियों के रोगियों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। डायरिया और वायरल बुखार के रोगियों की लंबी लाइन से जिला अस्पताल में बेडों का टोटा हो गया हे। एक-एक बेड पर दो-दो बच्चों को भर्ती किया जाना तो आम बात थी अब बड़ों के लिए बेंच का सहारा लेना पड़ रहा है फोल्डिंग पलंग भी कम पड़ रहे हैं। गुजरे चौबीस घंटे के अंदर डायरिया के 26 और बुखार के 11 मरीज जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए। भर्ती रोगियों में बुखार पीड़ित एक किशोरी की मौत हो गई। स्टाफ कम और मरीज अधिक यह हाल तो चल ही रहा था अब बेड ने होने से रोगियों को लौटाने की नौबत भी आ जाती है।
जिला अस्पताल में बीते चौबीस घंटे के अंदर डायरिया के 26 रोगी और बुखार के 11 मरीज भर्ती कराए गए। इनमें बुखार से ग्रसित नीतू (15) पुत्री जगतनारायण निवासी मैनी खेड़ा की मौत हो गई। डायरिया और बुखार के रोगी बढ़ने से सबसे अधिक समस्या बेडों की है। बेड न होने की बात कह अगर डाक्टर भर्ती करने से इंकार करते हैं तो तीमारदारों की खरीखोटी सुननी पड़ती है। अगर एक बेड पर दो मरीज भर्ती करते हैं तो वार्ड के स्टाफ को तीमारदारों के रोष का सामना करना पड़ता है। रविवार को मध्याह्न 2 बजे तके जिला अस्पताल के वार्ड नंबर 1 में 69 मरीज भर्ती किए जा चुके थे। जबकि वार्ड में बेड 48 और 5 फोल्डिंग पलंग डालने की ही व्यवस्था है।
सबसे अहम समस्या यह है कि 69 रोगियों के दवा उपचार के लिए सिर्फ स्टाफ नर्स ही ड्यूटी पर रहती है। सीएमएस का कहना हैं कि अस्पताल आने वाला कोई रोगी वापस न जाए इसके लिए अतिरिक्त बेड की व्यवस्था के साथ ही जरूरत पड़ने पर रोगियों को कार्डियोलाजी में भर्ती कराया जाता है। यहां उल्लेखनीय है कि दो बजे के बाद कार्डियोलाजी में भर्ती मरीजों की देखरेख भी वार्ड की स्टाफ को ही करनी पड़ती है। कार्डियोलाजी की स्टाफ दो बजे तक ही रहती हैं।
