यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
डायरिया से दो की मौत, दर्जनों बीमार

हुसेनगंज, संवाद सूत्र : मवई मजरे कनई पर गांव में फैली डायरिया की बीमारी ने दो बच्चों को लील लिया। चपेट में दर्जनों लोग आ गए हैं। फैली बीमारी से लोगों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। खबर लगते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रोकथाम के प्रयास शुरू किए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत प्रभावित गांव में मंगलवार को अपने ननिहाल आई सात साल की मोहिनी और प्रदीप रैदास के छह साल के पुत्र ननकू की मौत हो गई। लड़की की मौत सुबह 10 बजे हुई तो लड़के की मौत शाम 4 बजे हुई। उल्टी दस्त से प्रभावितों में गोरे (14), अजय (8), अनिरुद्ध (5), पुत्ती (45), राधा देवी (18), रूक्मिणी (15), रोशनी (10), पुष्पेंद्र (8), आदि हैं। मौतों और प्रभावितों के उल्टी दस्त से पीड़ित होने से गांव में भय का माहौल व्याप्त है। बीमारी की सूचना पर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मवई के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आरके जाटव पहुंचे। टीम ने मरीजों का परीक्षण किया। उन्हें आवश्यक दवाएं और ओआरएस के घोल के पैकेट बांटे। गांव के एक कुएं के पानी न पीने की सलाह दी। सीएमओ डा. एमपी वर्मा ने बताया कि स्थिति को ध्यान रखते हुए सीएचसी से डाक्टरों की एक टीम और भेज दी गई। जो वहीं रात भर रुकेगी।
..कहीं फूड प्वाइजनिंग तो नहीं
बीते दिन गांव में बारात आई थी। गांव वालें विवाह में आमंत्रित थे। रात में भोजन आदि किया था। सुबह पहर से उल्टी दस्त शुरू हो गए। लोगों को शंका है कि कहीं खाने में कुछ गड़बड़ तो नहीं था।
गर्मी का 'कहर' बीमारियों की 'लहर'
फतेहपुर, जागरण संवाददाता : भीषण गर्मी से आम जनमानस बेहाल हो गया है। बीमारियों से अस्पताल पटे हुए हैं। बच्चों में सबसे ज्यादा डायरिया के मरीज हैं। आम आदमी में तेज बुखार (हीट स्ट्रोक), खांसी, जुकाम बुखार की शिकायत हो रही है। डॉक्टर प्रचंड गर्मी से निपटने के लिए मरीजों को दवाओं के साथ बचने की सलाह दे रहे हैं।
आसमान से बरस रही धूप धरती पर कहर बन कर टूट पड़ी हैं। शहर से लेकर गांव तक बीमारी की लहर चल पड़ी है। हर घर में बीमारी ने दस्तक दे रखी है। किसी को धूप लगने से हीट स्ट्रोक की दिक्कत हो रही है तो किसी को खान पान से पेट में संक्रमण फैलने की बीमारी से दो चार होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल से लेकर गांवों में खुले सरकारी अस्पतालों की ओपीडी दो गुनी हो गई है। यही हाल प्राइवेट डॉक्टरों के नर्सिग होम और क्लीनिकों का है। मरीजों की लंबी कतारे लगी हुई है। जिला अस्पताल में गरीब तबके के लोग ज्यादा ही दिख रहे हैं। मंगलवार को अस्पताल में फिजीशियन तथा बाल रोग विशेषज्ञों के कमरे में भीड़ दिखी। इलाज कराने आए रामकुमारी की गोद में तीन माह की बेटी रही। बुखार से पीड़ित बच्ची को दिखाने आई थी। सरलावती, सुनैना, रामकिशोर बच्चों को दिखाने आए थे। बोले कि गांव में इलाज करा रहे थे। बुखार ठीक नहीं हो रहा है। उल्टी दस्त से पीड़ित शिव किशोर बोले कि कल बारात में खाने से दिक्कत हो गई है। डॉक्टर ने दवाएं और ओआरएस के घोल वाला पानी पीने की सलाह दी है। इसके बाद फायदा न होने पर तुरंत भर्ती हो जाने को कहा है। उल्टी दस्त से पीड़ित बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि बुखार और उल्टी से निजात नहीं मिल पा रही है। दवाओं के साथ शुद्ध पानी पिलाए जाने की सलाह दी है।
'बच्चों में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता की कमी होती है। इस लिए बच्चे जल्द बीमार हो जाते हैं। मौसम परिवर्तन में खुद को नहीं ढाल पाते हैं। इस लिए बचाव कारगर तरीका है। डायरिया जैसे केश में सेलाइन (ग्लूकोज) चढ़ाया जाता है। जिससे जल्द राहत मिलता है। '
डॉ. एम चंद्रा बाल रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल
