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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 21, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चुनावी मैदान में भी मजबूत हैं रिश्ते

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Published: Fri, 21 Mar 2014 10:28 PM (IST)

फैशन और बदलती जीवन शैली के चलते भले ही पारिवारिक रिश्ते दरक रहे हैं, लेकिन चुनाव के मैदान में ये ...और पढ़ें

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पटना, [अरुण अशेष]। फैशन और बदलती जीवन शैली के चलते भले ही पारिवारिक रिश्ते दरक रहे हैं, लेकिन चुनाव के मैदान में ये रिश्ते अचानक जीवंत हो उठे हैं। कम से कम बिहार में तो यही नजर आ रहा है। एकाध अपवाद को छोड़ दें तो राजनीतिक विचारधारा रिश्तों में बाधक नहीं बन रही है।

पूर्व विधायक रणवीर यादव फिलहाल जदयू में हैं और अभी उन्होंने जदयू छोड़ने का एलान भी नहीं किया है। लेकिन खगड़िया लोकसभा सीट से राजद उम्मीदवार अपनी दूसरी पत्नी कृष्णा कुमारी यादव के लिए वे वोट मांग रहे हैं। जबकि उनकी पहली पत्नी पूनम यादव जदयू की विधायक हैं और वह भी बहन के लिए वोट मांगेंगी। पाटलिपुत्र से लोकसभा उम्मीदवार राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारती बताती हैं कि उनकी लड़ाई दो चाचाओं से है। जदयू के डॉ रंजन प्रसाद यादव और भाजपा के रामकृपाल यादव को वे अपना चाचा बताती हैं। दोनों से लालू प्रसाद के पारिवारिक संबंध भी रहे हैं। खैर, दोनों चाचा रिश्ते तो कबूल करते हैं, लेकिन इस आधार पर भतीजी को कोई रियायत नहीं देना चाहते। इसके अलावा औरंगाबाद के कांग्रेस उम्मीदवार निखिल कुमार के साले उदय सिंह पूर्णिया से भाजपा के उम्मीदवार हैं। हालांकि गनीमत इस बात की है कि दोनों क्षेत्र एक-दूसरे से काफी दूरी पर हैं। पूर्व सांसद पप्पू यादव मधेपुरा से राजद के उम्मीदवार हैं। जबकि उनकी पत्नी रंजीत रंजन सुपौल से कांग्रेस की उम्मीदवार। दोनों एक दूजे के लिए वोट मांगें तो इसमें राजनीतिक विचारधारा आड़े नहीं आएगी। यहां राजद और कांग्रेस में गठबंधन भी इसकी छूट देता है।

इनमें अपवाद हैं रेणु कुशवाहा जो बिहार सरकार में मंत्री थीं। लेकिन पति विजय कुमार भाजपा में गए तो रेणु ने नैतिकता के आधार पर नीतीश कुमार की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया, पार्टी नहीं छोड़ी। अब उनके पति भाजपा के टिकट पर मधेपुरा से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन रेणु ने बृहस्पतिवार को एलान किया कि वह पति की पार्टी भाजपा के बदले अपनी पार्टी जदयू के लिए वोट मांगेंगी।

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