यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 24, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
डेंगू से एक और मरीज की मौत
संवाद सूत्र, बड़बिल : बड़बिल नगर से तीन मरीजों को शनिवार को क्योंझर रेफर किया गया। उनमे

संवाद सूत्र, बड़बिल : बड़बिल नगर से तीन मरीजों को शनिवार को क्योंझर रेफर किया गया। उनमें से एक 45 वर्षीय राधिका गुप्ता वार्ड संख्या आठ में अपने रिश्तेदार के घर आयी थी जिनका स्थायी पता उत्तर प्रदेश के बलिया का है। डेंगू की चपेट में आ गई। शनिवार को बड़बिल स्वास्थ्य केंद्र में अचानक उनके पेट में दर्द हुआ। इसके बाद उन्हें क्योंझर रेफर कर दिया गया। यहां पर पीड़िता राधिका को एक बोतल रक्त चढ़ाया गया। इसके बाद उसे कटक रेफर कर दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राधिका का हीमोग्लोबिन 6.8 था। शनिवार रात 11 बजे कटक एससीबी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किए जाने के बाद 11.45 बजे उसकी मौत हो गई। राधिका समेत अब तक चार लोगों की मौत डेंगू से चुकी है।
इधर बड़बिल नगर में डेंगू रोग के प्रभाव से 29वें दिन भी मरीजों की कतार में कमी नहीं नजर आ रही है। प्रत्येक दिन उक्त आंकड़ा औसतन 150 के ऊपर ही रहा है। रविवार को यह आंकड़ा दोपहर तक 150 दर्ज किया जा चुका था। डेंगू से ग्रसित नगरवासी पर्याप्त जानकारी एवं चिकित्सकों की बयानबाजी से आक्रोशित हो रहे हैं। चिकित्सकों द्वारा मरीजों का गंभीरतापूर्वक इलाज नहीं किये जाने एवं चंद घंटे बाद छुट्टी दिए जाने से रोष में है। ऐसा ही एक उदाहरण वार्ड संख्या सात कासामाने आया है। एक विद्यार्थी जो गत 17 जुलाई को सुबह 11 बजे भर्ती हुआ और उसे दो स्लाइन देकर शाम छह बजे छुट्टी कर दी गई। उक्त विद्यार्थी 20 जुलाई को पुन: इलाज हेतु केंद्र पहुंचा एवं 21 जुलाई को रक्त नमूने संग्रह कर उसे छोड़ दिया गया। आगामी दिनों रक्त जांच की रिपोर्ट के आधार पर उक्त विद्यार्थी का प्लेटलेट काउंट 45000 मात्र था ¨कतु जानकारी के अभाव में विद्यार्थी के परिवार वाले मरीज को शिक्षा ग्रहण हेतु विद्यालय भेज दिये। विद्यालय से लौटने के बाद उसे पुन: क्योंझर रेफर किया गया। इसके अतिरिक्त नगर के कई डेंगू मरीज के परिवार के सदस्यों का कहना था कि चिकित्सा के क्रम में चिकित्सक पूर्ण इलाज हेतु घर में प्रत्येक दिन हवन करने से निदान मिलने का हास्यपद कथन से मरीजों के परिवार का चिकित्सा प्रणाली से विश्वास खोता देखा गया है।
