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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 21, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बंद हो दलित-आदिवासियों का शोषण

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Published: Mon, 21 Oct 2013 01:44 AM (IST)Updated: Mon, 21 Oct 2013 01:45 AM (IST)

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मेदिनीनगर : देश व राज्य के 85 प्रतिशत दलित-आदिवासी समाज आज भी सरकारी योजनाओं से महरूम हैं। गांव व कस्बों में दलितों के बीच छुआछुत, हिंसा, अत्याचार व भेदभाव कायम है।

उक्त बातें दलित अधिकार सुरक्षा मंच के प्रदेश संयोजक विनोद कुमार ने कहीं। वे रविवार को स्थानीय टाउन हॉल में आयोजित दलित आदिवासी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन दलित अधिकार सुरक्षा मंच व संपूर्ण ग्राम विकास केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसके पूर्व लोगों ने दीप जला व बाबा साहेब भीम राव अंबेदकर की तस्वीर पर माल्यार्पण कर सम्मेलन का उदघाटन किया। इसमें दलित-आदिवासी व उपेक्षित समुदाय के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन, सुरक्षा, भूमि अधिकार आदि ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई। सम्मेलन में इंद्रमणि साहु, चमन लाल, रामू आनंद, रंधीर कुमार, रघुराई राम, सुनील गौतम, प्रेम प्रकाश, टेनी कुमार महतो, संजय कुमार, चंदन कुमार, तारा देवी, प्रतिमा देवी, सुशीला देवी, सूरजमणि देवी, रामदुलारी देवी, रंजन राम, जयशंकर पासवान, नरेश यादव, राजदेव शर्मा, सुरेश राम समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। सम्मेलन के पूर्व लोगों ने रैली निकाली। यह शहर के मुख्य मार्गो के भ्रमण के बाद टाउन हॉल पहुंचकर सम्मेलन में बदल गई। रैली में लोग दलित आदिवासियों पर शोषण, अत्याचार बंद करो आदि नारे लगा रहे थे।

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