यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 05, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जापानी इंसेफ्लाइटिस के तीन संदिग्ध मरीज मिले
संवाद सहयोगी, जमशेदपुर : स्वाइन फ्लू से जूझ रहे शहरवासियों को जापानी इंसेफ्लाइटिस भी परेशान किए हुए

संवाद सहयोगी, जमशेदपुर : स्वाइन फ्लू से जूझ रहे शहरवासियों को जापानी इंसेफ्लाइटिस भी परेशान किए हुए है। शनिवार को तीन मरीजों में जापानी इंसेफ्लाइटिस के लक्षण पाए गए। इन सभी का इलाज टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में चल रहा है।
जिला सर्विलांस पदाधिकारी डॉ. शाहिर पाल के मुताबिक इस मौसम में जापानी इंसेफ्लाइटिस के मरीज मिलना चिंता का विषय है। इसके प्रति लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। डॉ. शाहिर पाल ने कहा कि इंसेफ्लाइटिस से बचने के लिए साफ-सफाई व विशेष ध्यान रखें। घर पर कहीं भी मच्छरों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए कीटनाशक का प्रयोग करें। रात में सोते हुए मच्छरदानी लगाएं। संक्रमण को फैलाने वाले मच्छर शाम के समय काटते हैं। इसलिए शाम के समय पूरे कपड़े पहनें। बच्चों को इंसेफ्लाइटिस का टीका जरूर लगवाएं।
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क्या है इंसेफ्लाइटिस : मस्तिष्क में सूजन होना इंसेफ्लाइटिस कहलाता है। यह वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है। इस संक्रमण में शरीर की री प्रतिरक्षा प्रणाली बिगड़ जाती है और ब्रेन टिश्यू पर हमला होता है। संक्रमण अचानक होता है और तीव्रता के साथ बढ़ता है। इस संक्रमण में दो बीमारियां प्रमुख रूप से सामने आती हैं। जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एइएस)। इनकी चपेट में सबसे ज्यादा 15 साल तक की उम्र के बच्चे आते हैं।
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