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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 14, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जापानी इंसेफेलाइटिस से बच्ची की मौत

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Published: Thu, 14 Aug 2014 01:12 AM (IST)

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संवाद सहयोगी,जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) से बुधवार को मौत होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जिले में जेई से यह दूसरी मौत है। बिरसानगर निवासी दीपक कर्मकार की 8 वर्षीय बेटी स्वाति कर्मकार की तबीयत बिगड़ने पर उसे 4 अगस्त को बारीडीह स्थित मर्सी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने बच्ची का रक्त लेकर जांच को एमजीएम कॉलेज भेजा था। रिपोर्ट बुधवार को आया और इसमें जेई होने की पुष्टि हुई। इसके कुछ ही देर के बाद बच्ची की मौत हो गई। पिता दीपक कर्मकार ने बताया कि स्वाति कर्मकार कक्षा 1 में पढ़ती थी। वह बिरसानगर स्थित मानो विकास विद्यालय की छात्रा थी। स्वाति को बीते दस दिनों से बुखार था, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया। बुखार काफी तेज हुआ तो उसे मर्सी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं 5 फरवरी को भी टेल्को के एक युवक की मौत टाटा मुख्य अस्पताल में हो गई थी।

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जेई के बाद डेंगू की दस्तक

जेई के साथ अब डेंगू भी दस्तक दे चुका है। एमजीएम थाना अंतर्गत दलदली गांव की साढ़े चार साल के एक बच्ची में डेंगू के लक्षण पाए गए है। उसका इलाज मर्सी अस्पताल में चल रहा है। चिकित्सकों ने रक्त का नमूना लेकर जांच को भेजा है। बच्ची की स्थिति काफी गंभीर बतायी जा रही है। बच्ची का इलाज आइसीयू में चल रहा है। ज्ञात हो कि जिले में अबतक जेई के कुल 22 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। इसमें एक की मौत हो गई है।

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टीएमएच व मर्सी को नहीं भेजा गया किट

स्वास्थ्य निदेशक ने सख्त निर्देश दिया है कि जिन क्षेत्रों व अस्पतालों में बरसाती बीमारियों से संबंधित अधिक पीडि़त मिलते हैं वहां पर एनएस-1 किट तत्काल उपलब्ध कराया जाए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अबतक यह किट उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। जबकि बीते वर्ष यह सुविधा टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) व मर्सी अस्पताल में उपलब्ध करायी गई थी। इससे पीड़ित की तत्काल जांच कर इलाज शुरू की जा सकती है। अबतक जेई के सबसे अधिक पीड़ित मर्सी अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इसके बाद टीएमएच व हरपाल सिंह नर्सिग होम है।

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कर्मचारियों को सता रहा एक्सपायरी का भय

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले के 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एनएस-1 किट उपलब्ध कराया गया है, लेकिन वहां इस्तेमाल नहीं हो रहा है। कारण किट जैसे का तैसा पड़ा हुआ है। जिसके कारण कर्मचारियों को अब एक्सपायरी का भय सता रहा है।

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जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षण

सिरदर्द, तेज बुखार, गर्दन में अकड़न, घबराहट, कोमा में चले जाना, कंपकपी, कभी-कभार ऐंठन (विशेष रूप से छोटे बच्चों में) सहित अन्य शामिल है। जेई की संचयी कालवधि सामान्यत 5 से 15 दिन होती है। इसकी मृत्युदर 0.3 से 60 फीसद तक होती है।

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पीड़ित को अगर सही समय पर लाया जाता तो शायद बचाया जा सकता था। चिकित्सकों की टीम ने काफी प्रयास की, लेकिन बचाया नहीं जा सका। यह रोग अलग-अलग देशों में अलग अलग समय पर होता है। क्षेत्र विशेष के हिसाब से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में अधिक होता है। मर्सी अस्पताल में अबतक जितने पीड़ित पहुंचे है उनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र से ही है।

- डॉ. शुभोजित बनर्जी, शिशु रोग विशेषज्ञ, मर्सी अस्पताल