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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 02, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अज्ञात बीमारी की जाच को सुनसुनिया पहुंची मेडिकल टीम

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Published: Mon, 02 Jun 2014 09:53 PM (IST)

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-दिनभर की कवायद का नहीं निकला कोई नतीजा, दहशत में ग्रामीण

संवाद सूत्र, चाकुलिया : प्रखंड के भातकुंडा पंचायत अंतर्गत सुनसुनिया गाव में अज्ञात बीमारी से दो मासूम बच्चों की मौत के बाद सोमवार को जिला व अनुमंडल की दो मेडिकल टीमें जंाच को पहुंची। अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. केसी सिंह मुंडा के नेतृत्व में आई टीम ने पीड़ित परिवार के सदस्यों से गहन पूछताछ कर रोग के संबंध में जानने का प्रयास किया, लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। लिहाजा, दोनों बच्चों की मौत किस वजह से हुई, यह स्पष्ट नहीं हो पाया। गौरतलब है कि सुनसुनिया में एक ही परिवार के दो बच्चों की मौत बीते चार दिनों के भीतर हो जाने से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। सबसे पहले गाव के श्रीमत हेम्ब्रम का पाच वर्षीय पुत्र अजय की मौत विगत बुधवार की शाम हुई थी। उसके बाद रविवार सुबह श्रीमत के भाई लक्खीराम हेम्ब्रम की पुत्री उर्मिला की मौत भी उसी तरह शरीर व पेट में दर्द के बाद अचानक हो गई थी। ग्रामीणों का भय सोमवार को तब और बढ़ गया जब श्रीमत के पड़ोसी भूषण हेम्ब्रम की पत्‍‌नी चंपा हेम्ब्रम की तबियत भी अचानक खराब हो गई। चंपा घर में काम कर रही थी, तभी उसे भी तेज दर्द हुआ और वह बेहोश हो गई। आनन-फानन में उसे चाकुलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। यहा सेलाइन व दवाएं देने के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ। उधर, सुनसुनिया में उपजे हालात को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को पहले अनुमंडल तथा बाद में जिला की टीम भेजी। अनुमंडल की टीम में डॉ. नीलम टोप्पो के अलावा चाकुलिया के स्वास्थ्यकर्मी मंजू कुमारी, संतोष कुमार, गीता महतो, सत्येन्द्र कुमार, वंदना सीट आदि शामिल थे। जब इस टीम को बीमारी के बारे में कुछ समझ में नही आया तो सिविल सर्जन के निर्देश पर जिला से एक और टीम जांच के लिए भेजी गई। इसमें एसीएमओ डॉ. केसी सिंह मुंडा के अलावा डब्ल्यूएचओ की डॉ. सुमन कंडुला शामिल थे। दोनों ही टीमों ने रोगों के लक्षण के संबंध में काफी पूछताछ की, पर किसी निष्कर्ष पर नही पहुंच सके।

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दिनभर सुनसुनिया में जमें रहे समीर

सुनसुनिया में हुई बच्चों की मौत के मद्देनजर आजसू जिलाध्यक्ष समीर महंती सोमवार को दिन भर गाव में डटे रहे। उन्होंने न केवल पीड़ित परिवारों की आर्थिक मदद की, वरन मेडिकल टीम को जाच में भी सहयोग किया। आजसू नेता ने कई बार घाटशिला एसडीओ गिरिजा शकर प्रसाद तथा सिविल सर्जन एलबीपी सिंह से बातचीत की और ग्रामीणों की आशका से अधिकारियों को अवगत कराया। सुनसुनिया में समीर के अलावा भातकुंडा के उपमुखिया मनोरंजन महतो, मिहिराम सोरेन, मंगल हासदा, धनंजय करूणामय, मोहन मैती आदि मौजूद रहे।

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अंधविश्वास के साये में सुनसुनिया

पंकज मिश्रा, चाकुलिया

भूत खा गया या डायन निगल गई, या फिर किसी ओझा-गुनी ने कुछ कर दिया। विज्ञान के नजरिये से भले ही ये बातें अंधविश्वास हों, पर दो बच्चों की अज्ञात बीमारी से मौत के बाद सुनसुनिया गाव के लोगों की जुबान पर सोमवार को सिर्फ यही जुमला था। दरअसल, जब इंसान को किसी अनहोनी घटना का कोई ठोस कारण समझ में नही आता, तो उसके दिलोदिमाग में वही बातें घूमने लगती है जिनकी चर्चा समाज में सालोंसाल से होती आ रही है। अशिक्षा व अज्ञानता इसमें खाद-पानी देने का काम करती है। सुनसुनिया गाव में भी ठीक ऐसा ही हो रहा है। चार दिनों के भीतर एक ही परिवार के दो मासूमों की मौत के बाद ग्रामीणों को कुछ नही सूझ रहा है। घूम-फिरकर उनका दिमाग भूत-डायन पर ही आकर ठहरता है। यही कारण है कि रविवार की सुबह लक्खीराम हेम्ब्रम की तीन वर्षीय पुत्री उर्मिला की मौत के बाद भी उसके परिजनों ने रात में ओझा को बुलाकर झाड़-फूंक कराया। बताया जा रहा है कि झाड़-फूंक के बाद भी ओझा जब बच्ची को जीवित नही कर पाया तो नाराज लोगों ने उसकी धुनायी भी कर डाली। रात में किसी तरह हाथीबारी गाव निवासी ओझा ने भागकर जान बचायी। दरअसल, उर्मिला की मौत से तीन दिन पहले उसके चचेरे भाई अजय हेम्ब्रम की मौत भी इसी तरह हो गयी थी। जिसके बाद उसी ओझा ने घर में आकर झाड़-फूंक किया था तथा बिल्ली की बलि देकर पूजा की थी। साथ ही आश्वास्त किया था कि आगे कोई अनहोनी नही होगी। लेकिन जब परिवार में दुबारा मौत हो गई तो ओझा को इसकी कीमत चुकानी पड़ी। सोमवार को सुनसुनिया गांव आयी मेडिकल टीम भी जब बच्चों की मौत की कोई ठोस वजह नही बता पाई तो लोगों के बीच भूत-डायन की बातें एकबार फिर घर कर गई। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहा चिकित्सा विज्ञान से जुड़े लोग बच्चों की मौत में मेडिकल कारण ढूंढ रहे है, वहीं दूसरी ओर अनहोनी की आशका से आतंकित ग्रामीण भी अपने स्तर से सक्षम ओझा-गुनी को खोज रहे है।