यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 24, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गरबांध में डायरिया से एक की मौत

नगर उंटारी : बरसात शुरू होते ही नगर उंटारी अनुमंडल में डायरिया एवं मलेरिया महामारी का रूप ले लेता है। समय रहते इस पर अमल करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग सोया रहता है। बयानबाजी होती है कि डायरिया-मलेरिया से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग कमर कस चुका है। सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर दवा उपलब्ध करा दी गई है और चिकित्सीय टीम गठित कर दी गई है। परंतु गरबांध में फैले डायरिया ने स्वास्थ्य विभाग के सभी दावे की हवा निकाल दी है।
यहां13 दिनों से डायरिया से दर्जनों लोग प्रभावित हुए हैं। एक बच्चा की मौत भी हो चुकी है। बावजूद इसके डायरिया-मलेरिया से बचाव की प्रथम प्रक्रिया ब्लिचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं किया गया है। नगर उंटारी अनुमंडल क्षेत्र के गरबांध, नयाखाड़, कुसडंड, बहियार कला, पतिहारी, बम्बा ऐसे गांव है जहां हर वर्ष डायरिया महामारी का रूप लेता है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग समय पूर्व न तो इसके लिए और ना ही बीमारी फैल जाने के बाद तत्परता दिखाता है।
लोग सरकारी अस्पताल होने के बावजूद प्राइवेट में इलाज कराना उचित समझते हैं। नगर उंटारी अनुमंडलीय अस्पताल के अंतर्गत रमना, नगर उंटारी और विशुनपुरा प्रखंड में कुल 19 उपस्वास्थ्य केंद्र हैं जहां एएनएम की प्रतिनियुक्ति की गई है। परंतु कोई भी सेंटर ऐसा नहीं जो रात में खुलता हो। जबकि सभी एएनएम को अपने केंद्र पर रहना है।
लचर व्यवस्था पर क्या कहना है लोगों का
-अस्पताल की व्यवस्था काफी लचर है। लोग पूर्ण रूप से अस्पताल पर ही आश्रित रह गए तो उनकी जान चली जायेगी। यदि समय रहते स्वास्थ्य विभाग सजग हो जाए तो डायरिया-मलेरिया से रोगी को बचाया जा सकता है।
फोटो-33 सूर्यदेव मेहता, नरखोरिया
-आज यदि ग्रामीण क्षेत्र में झोला छाप चिकित्सक न हो तो सरकारी चिकित्सक के भरोसे लोग अपनी जान गंवा बैठेंगे। झोला छाप चिकित्सकों को बढ़ावा भी स्वास्थ्य विभाग ही देता है। बरसात पहुंच आ है। परंतु कहीं भी ब्लिचिंग पाउंडर व डीडीटी का छिड़काव नहीं हो सका है।
फोटो-34 मुखिया मथुरा राम, पाल्हेकला ।
-अनुमंडलीय अस्पताल हाथी दांत है। जो खाने के बजाये दिखाने के लिए है। बरसात शुरू होने के बाद अस्पताल का सच जानना है तो प्राईवेट चिकित्सक के यहां लगने वाली भीड़ से देख सकते हैं। सरकारी अस्पताल के चिकित्सक सिर्फ खोखला बयानबाजी करते है।
सैयद अंसारी, कुसंडड।
-स्वास्थ्य विभाग कितना तत्पर है, गरबांध गांव से अधिक कोई नहीं जानता। आज 13 दिनों से डायरिया अपना कहर बरपा रहा है। परंतु चिकित्सक एवं चिकित्साकर्मी नियमित रहने को तैयार नहीं है। करोड़ों रुपये की लागत से केंद्र बनकर तैयार है।
मुखिया सोहन उरांव, गरबांध।
कोट::::::::::::::-
-डायरिया मलेरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग सजग है। सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर मलेरिया-डायरिया का दवा उपलब्ध करा दिया गया है। साथ ही इससे निपटने के लिए टीम का गठन किया गया है जो डायरिया-मलेरिया फैलने की स्थिति में कार्य करेगा। वैसे सभी प्रभावित क्षेत्र में डीडीटी और ब्लिचिंग पाउडर उपलब्ध करा दिया गया।
डा. अजित सिंह प्रभारी अस्पताल उपाधीक्षक, अनुमंडलीय अस्पताल नगर उटारी।
