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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 06, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रहस्यमय बुखार से मर रहे बच्चे

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Published: Mon, 06 Oct 2014 05:45 AM (IST)Updated: Sun, 05 Oct 2014 09:34 PM (IST)

संसू, लोयाबाद : इलाके में रहस्यमय बुखार पिछले एक माह से बच्चों को मौत की नींद सुला रही है। यहां पिछ

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संसू, लोयाबाद : इलाके में रहस्यमय बुखार पिछले एक माह से बच्चों को मौत की नींद सुला रही है। यहां पिछले एक माह के दौरान रहस्यमय बुखार से तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। रविवार को यहां एक और बच्चे की मौत के बाद क्षेत्र में सन्नाटा पसरा है। वहीं कई बार के प्रयास के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अभी तक इस बीमारी की पहचान तक नहीं कर पाया है। ऐसे में इस बीमारी का शिकार बननेवाले बच्चों को सही चिकित्सा भी नहीं हो पा रही है।

रविवार को इस रहस्यमय बुखार से लोयाबाद कनकनी तीन नंबर मुखर्जी धौड़ा निवासी श्यामसुंदर भुइयां के पांच वर्षीय पुत्र कालीचरण की मौत हो गयी। एक माह के अंदर इस बीमारी से यह तीसरी मौत है। श्यामसुंदर भुइयां ने बताया कि चार-पांच दिन पूर्व पुत्र को बुखार हुआ था। स्थानीय चिकित्सकों से उसका इलाज चल रहा था। शनिवार रात अचानक उसे तेज बुखार हुआ और वह पेट दर्द की भी शिकायत करने लगा। सुबह में चिकित्सक के पास ले जाने की तैयारी चल रही थी, इसी बीच उसकी मौत हो गई।

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दो की पहले हो चुकी मौत :

19 सितंबर को लोयाबाद पांच नंबर निवासी संतोष बाउरी की 12 वर्षीय पुत्री सुधा तथा 28 सितंबर को एकड़ा निवासी बबलू पाल के 13 वर्षीय पुत्र अजय पाल की मौत भी इसी रहस्यमय बुखार से हो चुकी है। इन मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नया धौड़ा, पांच नंबर मोहल्ला तथा बांसजोड़ा 12 नंबर में सर्वे किया था। सभी के रक्त नमूनों की जांच की गई थी लेकिन इसमें न तो किसी में मलेरिया मिला और न ही डेंगू। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अभियान रोक दिया।

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विशेषज्ञों की मदद से की जाएगी बीमारी की पहचान

धनबाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. आलोक विश्वकर्मा ने बताया कि लोयाबाद में बच्चों की मौत को लेकर विभाग द्वारा इलाके में सर्वे किया गया था लेकिन बीमारी की पहचान नहीं हो पाई। अब इस बीमारी की पहचान के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद ली जाएगी। इसके लिए पीएमसीएच को पत्र लिखा जाएगा। पीएमसीएच के विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से बच्चों को शिकार बना रही इस बीमारी की पहचान की जाएगी। इसके बाद बचाव को आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।