यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 04, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हिमाचल प्रदेश में 70 पुल खतरनाक व सिंगल-वे
प्रदेश में वर्तमान में पुलों की संख्या दो हजार से अधिक है। इनमें से बहुत पुराने पुलों की संख्या भी 15 फीसद के करीब बताई जाती है।

शिमला, राज्य ब्यूरो। हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से खतरे की जद में है। पहाड़ी प्रदेश होने के नाते लगभग आधा हिमाचल खतरे में है। यही कारण है कि हर वर्ष 150 से 200 के करीब लोगों की मौत प्राकृतिक आपदाओं के कारण होती है। प्रदेश में 70 के करीब पुल अधिकपुराने व खतरनाक हैं जिन्हें बदलने के लिए लोक निर्माण विभाग ने प्रारूप तैयार किया है। इनमें से कुछ पुलों की तो हालत तो काफी दयनीय है। यह पुल हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं। इनमें से कुछ पुल तो राष्ट्रीय उच्च मार्ग और प्रदेश के बड़े मार्गों पर हैं।
प्रदेश में वर्तमान में पुलों की संख्या दो हजार से अधिक है। इनमें से बहुत पुराने पुलों की संख्या भी 15 फीसद के करीब बताई जाती है। प्रत्येक जिले में आठ से 10 पुल तो ऐसे हैं जो हादसों का कारण बन रहे हैं और इनपर से गुजरना खतरे से खाली नहीं है। यह स्थिति इनकी हालत और सिंगल-वे के कारण है। साथ ही पहाड़ों के दरकने की घटनाएं प्रदेश में लगातार हो रही हैं जो हर वर्ष सैकड़ों लोगों की मौत का कारण
बनते हैं। अब जैसे-जैसे मौसम साफ होगा ऐसी घटनाओं में इजाफा होगा।
कौन-कौन से पुल खतरनाक व पुराने मेहली-शोघी सड़क पर, अश्वनी खड्ड पर बना पुल, जुब्बल में तीन, रामपुर में एक पुल, बिलासपुर में सात, मंडी पांच, कांगड़ा सात, सोलन छह, सिरमौर में पांच पुल
काफी पुराने हैं।
प्रदेश में जो भी पुल बहुत पुराने हैं उन्हें बदला जा रहा है। साथ ही सिंगल-वे पुल यानी जिनपर केवल एक ही गाड़ी के आने जाने का प्रावधान है उन्हें भी बदला जा रहा है। अब जो भी नए पुल बनाए जा रहे हैं उन्हें दो गाडिय़ों की आवाजाही के हिसाब से ही बनाया जा रहा है।
-आरपी वर्मा, अभियंता प्रमुख, लोक निर्माण विभाग हिमाचल प्रदेश।
प्राकृतिक आपदा के लिए संवेदनशील जिले व क्षेत्र
प्रदेश में चंबा, कुल्लू, मंडी, शिमला, किन्नौर, सोलन और बिलासपुर शामिल हैं। इन जिलों में अनगिनत ऐसे स्थान व सड़कें हैं जो कि हर बरसात में कहर बनकर टूटती हैं। पूरा किन्नौर जिला प्राकृतिक आपदा से हर साल ग्रस्त रहता है। सतलुज में आई बाढ़ का मंजर आज भी नहीं भूलता है। ऊरनी ढांक में ऊपर से पत्थर गिरते हैं जिसने कई जानें लील ली हैं। साथ न्यूगलसरी व पांगी नाला भी अति संवेदनशील क्षेत्र हैं।
रोहडू में रोहडू-खदराला सड़क व रोहडू-चिढग़ांव सड़क में ऐसे कई हादसे हो चुके हैं वहीं देवीधार-सून्नी सड़क, रामपुर का घानवी, लूहरी रोड, जलोड़ी जोत के पास पशनूनाला, चौपाल का शालवी नदी के किनारे का क्षेत्र, झिकनी पुल से लेकर उत्तराखंड के भेडि़च पुल तक का क्षेत्र।
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