यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 20, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हिमाचल में माननीयों के लिए बिना शर्त भूमि, गरीब फिर रहे मारे-मारे
भूमिहीन गरीब को जमीन देने के लिए सरकार ने शर्ते लगाई हैं, विधायकों को सरकारी जमीन बिना शर्त दी जाएगी।

रविंद्र शर्मा, शिमला। दो दशक से आलीशान कोठियों में रह रहे हिमाचल प्रदेश के विधायकों को अब इनके छिनने का भय सता रहा है। नए आशियाने बसाने के लिए विधायक सरकार की चौखट पर जा पहुंचे हैं। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एमएलए सोसाइटी बनाई।
भाजपा व कांग्रेस के कई विधायकों ने मिलकर सरकार से मुफ्त जमीन मांगी है, जिस पर वे अपना मकान बना सकें। हालांकि भूमिहीन गरीब के लिए जमीन देने के लिए सरकार ने कई शर्ते लगाई हैं, परंतु विधायकों को सरकारी जमीन बिना शर्त दी जाएगी।
यही माना जा रहा है कि चुनाव हारने की स्थिति में रहने के इंतजाम के लिए पहले ही जमीन ली जा सके। इससे पहले विधायकों व पूर्व विधायकों ने सोसाइटी बनाई थी और सरकार ने इन्हें शिमला में मकान बनाने के लिए मुफ्त जमीन दी थी। इनमें भी कुछ कांग्रेस तो कुछ भाजपा के विधायक थे। कई तो मंत्री भी रहे हैं।
हैरत यह है कि सोमवार को कैबिनेट में जिस जमीन को इन विधायकों को देने के लिए उपायुक्त शिमला को निर्देश दिए हैं, वह जमीन उद्योगों के लिए चिह्नित की गई थी। विधायकों की दृष्टि इस बेहद खूबसूरत वादी पर है। वीरभद्र सरकार ने यह जमीन विधायकों को देने का निर्णय ले लिया है।
हालांकि विधायक व पूर्व विधायकों ने पहले जो भूमि व लोकेशन पसंद की थी, वह भी लाजवाब थी। तब सरकार ने यहां मूक बधिर बाल आश्रम बनाना प्रस्तावित कर दिया था इसलिए इसे दिया नहीं जा सका।
पहले भी दो बार दी गई है भूमि
अभी जुब्बड़हट्टी में यह भूमि देना तय हुआ है, परंतु माननीयों को सरकारी भूमि देने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी विधायकों व पूर्व विधायकों को दो बार मकान के लिए भूमि दी गई है। 1990 और 1997 के दौरान विधायकों को हीरानगर और मैहली में करीब 12 बीघा 16 बिस्वा भूमि दी गई थी। इनमें कुछ लोगों ने बहुमंजिला भवन बनाए तो कुछ ने इसे इसका व्यावसायिक इस्तेमाल कर दिया। कुछ विधायकों ने तो इसे कंपनियों को किराये पर भी चढ़ा दिया, जिससे मोटी कमाई हो रही है।
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विधायकों को भूमि देने का मंत्रिमंडल का निर्णय आम जनता से धोखा है। चुनाव के निकट पर ऐसे हास्यास्पद निर्णय विधायक और पूर्व विधायकों की छवि खराब करेंगे। भूमिहीन और गृहहीनों को दो-दो बिस्वा जमीन देने का वादा सरकार भूल गई है।
-प्रेम कुमार धूमल, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष, हिमाचल प्रदेश।
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